हरिद्वार ,
सावन की शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर तीर्थनगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी पर डाक कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवा रंग में रंगे लाखों शिवभक्त आस्था, ऊर्जा और भक्ति से सराबोर होकर मां गंगा का पवित्र जल लेने दौड़े। गली-गली, सड़क-सड़क शिवभक्तों के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
हर डाक कांवड़िए का संकल्प – ‘हर की पौड़ी से ही भरेंगे गंगाजल’
सावन की सबसे पावन रात यानी शिवरात्रि से पूर्व हर शिवभक्त एक ही संकल्प लेकर आया — हर की पौड़ी से ही गंगाजल भरकर अपने स्थानीय शिवालय में भोलेनाथ का जलाभिषेक करना। बीते कई दिनों से ये कांवड़िए लगातार पैदल दौड़ते हुए हरिद्वार पहुंचे हैं और जल भरते ही पुनः दौड़ पड़ते हैं अपने गंतव्य की ओर।
‘हर हर महादेव’, ‘बोल बम’ से गूंजा हरिद्वार
तीर्थनगरी में आज केवल भक्तिमय तरंगें हैं। कांवड़ियों के दल, जयकारों की गूंज, बोल बम के नारों और भगवा ध्वजों की लहराती कतारें — हर की पौड़ी पर यह नज़ारा शब्दों से परे है। भक्तों की आंखों में आस्था है, कदमों में गति है और कंठ में केवल शिव का नाम।
प्रशासन सतर्क, व्यवस्था चाक-चौबंद पर चुनौतियां बरकरार
हरिद्वार प्रशासन ने पूरी तीर्थनगरी को सुरक्षा घेरे में ले रखा है। बेरिकेड्स के माध्यम से डाक कांवड़ियों को निर्धारित रूट से ही प्रवेश दिया जा रहा है। मोटरसाइकिलों पर रोक के बावजूद कई स्थानों पर बाइक शोर और भगदड़ का कारण बनी। फिर भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पल-पल नजर रखे हुए हैं।
यह सिर्फ मेला नहीं — यह श्रद्धा, अनुशासन और जनशक्ति की मिसाल है
कांवड़ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, यह समाज की सामूहिक चेतना, अनुशासन और आत्मिक ऊर्जा का पर्व है। लाखों लोगों का एक लक्ष्य, एक मार्ग और एक विश्वास — यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। शिव की कृपा और मां गंगा की पावन धारा इस संगम को दिव्यता प्रदान कर रही हैं।
