जरूरतमंद विधवाओं, दिव्यांगों और बच्चों को आर्थिक सहायता, रायफल क्लब का सामाजिक रूप में अनूठा उपयोग
देहरादून,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से देहरादून जिलाधिकारी सविन बंसल ने रायफल क्लब फंड को एक सामाजिक पुनर्वास संसाधन के रूप में प्रयोग कर प्रदेश में अनूठी मिसाल कायम की है। अब तक इस फंड से ₹9.70 लाख से अधिक की सहायता जरूरतमंदों को दी जा चुकी है, जो इसे उपयोग करने वाला उत्तराखंड का पहला जिला बन गया है।
रायफल क्लब फंड से 6 महिलाओं को मिली राहत
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डीएम बंसल ने छह निर्धन व असहाय महिलाओं को ₹25-25 हजार के चेक प्रदान किए।
प्रमुख लाभार्थी:
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पूनम ठाकुर (गुलरघाटी) व बिरोजनी उनियाल (डालनवाला): बच्चों की स्कूल फीस
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आशा देवी (लकवा से पीड़ित, डालनवाला): इलाज और पुनर्वास
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खष्टी बिष्ट (नेहरू कॉलोनी): घरेलू कार्य से गुजारा करने वाली
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रेशमी (विकासनगर): दुर्घटनाग्रस्त पति के इलाज हेतु
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बबीता (गांधी ग्राम): अचार व्यवसाय शुरू करने की इच्छुक महिला
जिलाधिकारी ने लकवा पीड़ित आशा देवी को सहायता के बाद “सारथी वाहन” से उनके घर तक भिजवाया।
रायफल क्लब फंड: अब सामाजिक कल्याण का जरिया
डीएम सविन बंसल ने बताया कि अब रायफल क्लब की आय का उपयोग सिर्फ प्रशासनिक जरूरतों तक सीमित नहीं, बल्कि सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
अब तक वितरित मुख्य सहायता:
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झुग्गी बस्ती की दिव्यांग महिला को ₹1.3 लाख
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त्यूनी की विधवा नीतू देवी को बिजली बिल के लिए ₹18,000
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अनाथ अदिति के पिता के ऋण चुकाने हेतु ₹50,000
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भगत सिंह कॉलोनी निवासी शमीमा को स्वरोजगार हेतु ₹30,000
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सरस्वती शिशु मंदिर, भोगपुर को बच्चों के वाहन हेतु ₹5,73,950
रायफल क्लब: नया दृष्टिकोण, नया योगदान
1959 से संचालित रायफल क्लब में शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी हर प्रक्रिया पर एक निधि (फंड) ली जाती है। जिलाधिकारी की पहल पर इस फंड का दायरा अब बढ़ाया गया है:
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नई दरें तय – अब ₹2,500 से ₹25,000 तक का योगदान
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उद्देश्य – समाज के वंचित वर्ग की मदद
डीएम ने स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस लग्जरी ट्रांजैक्शन है, और इससे अर्जित राशि का उपयोग जनहित में होना चाहिए।
जमीनी प्रयासों की सराहना
जिलाधिकारी ने इस कार्य में जुटे फील्ड स्टाफ व अधिकारियों की भी सराहना की और कहा:
“हम गरीबों की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकते, लेकिन आर्थिक मदद से उनका जीवन थोड़ा बेहतर अवश्य बना सकते हैं। रायफल फंड को निवेश के रूप में लें और इसे स्वरोजगार या आत्मनिर्भरता की दिशा में उपयोग करें।”
उपस्थित अधिकारी
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उप जिलाधिकारी: कुमकुम जोशी
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मुख्य प्रशासनिक अधिकारी: कपिल कुमार
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अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण
निष्कर्ष:
देहरादून में रायफल क्लब फंड का सामाजिक सरोकारों में उपयोग सत्ता और सेवा के संगम का प्रतीक बन रहा है। यह मॉडल राज्य के अन्य जिलों के लिए अनुकरणीय हो सकता है।
