एमकेपी पीजी कॉलेज के कार्मिकों को 4 माह से नहीं मिला वेतन, राज्य कर्मचारी परिषद ने जताई चिंता – uttarakhandawaaz.in

एमकेपी पीजी कॉलेज के कार्मिकों को 4 माह से नहीं मिला वेतन, राज्य कर्मचारी परिषद ने जताई चिंता

सैनिक कल्याण विभाग में नियमविरुद्ध तबादलों पर भी उठाए सवाल, मुख्य सचिव को सौंपी शिकायत

देहरादून, 
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दो अहम मुद्दों को शासन के समक्ष उठाया। परिषद ने मुख्य सचिव उत्तराखंड से भेंट कर देहरादून के एमकेपी पीजी कॉलेज के कार्मिकों को बीते चार माह से वेतन नहीं मिलने की गंभीर समस्या को उठाया और त्वरित समाधान की मांग की।


एमकेपी पीजी कॉलेज: वेतन संकट गहराया

परिषद के अनुसार, मार्च 2025 से कॉलेज के शिक्षणेत्तर और अन्य कार्मिकों को वेतन नहीं मिल पाया है, जिससे उनके जीवनयापन में गंभीर कठिनाई उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में परिषद ने महादेवी कन्या पाठशाला शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा लिखे गए पत्र (दिनांक 4 जुलाई 2025) को संलग्न करते हुए शासन से शासनादेश संख्या 973 (दिनांक 21.12.2020) और 1027 (दिनांक 16.10.2024) के तहत त्वरित वेतन भुगतान के आदेश देने की मांग की।

पृष्ठभूमि:
एमकेपी कॉलेज प्रबंधन में आंतरिक विवाद और न्यायिक विवाद के कारण बीते वर्षों से वेतन भुगतान को लेकर बार-बार समस्याएं उत्पन्न होती रही हैं। परिषद ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए शासन से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है।


सैनिक कल्याण विभाग: नियम विरुद्ध तबादलों पर सवाल

श्री पांडे ने जानकारी दी कि 30 जून को सैनिक कल्याण विभाग में हुए स्थानांतरण को परिषद ने नियम विरुद्ध बताया है। इस पर मुख्य सचिव द्वारा सचिव, सैनिक कल्याण विभाग को जांच के निर्देश दिए गए।

परिषद पदाधिकारियों ने सचिव सैनिक कल्याण से भी भेंट की, जिनके निर्देश पर निदेशक सैनिक कल्याण को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया। पांडे ने बताया कि जहां एक ओर निदेशक दावा कर रहे हैं कि स्थानांतरण निर्वाचन आयोग की अनुमति से हुए, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने समाचार पत्रों में छपी खबरों के आधार पर सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है।


परिषद की मांगें और चेतावनी

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इन दोनों मामलों में त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि—

“सरकारी तंत्र की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो परिषद चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपना सकती है।”


निष्कर्ष:
यह मामला जहां एक ओर कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है, वहीं प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनाव आचार संहिता की मर्यादा को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। शासन से अपेक्षा है कि इन विषयों पर शीघ्रता और गंभीरता से निर्णय लिया जाएगा।

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