देहरादून,
उत्तराखंड: राजधानी देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में स्थित वर्षों से उपेक्षित अंतरराष्ट्रीय आइस रिंक अब सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। खिलाड़ियों की अभ्यास करती तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं, जिसने इस आइस रिंक को एक नया जीवन दे दिया है।
उत्तराखंड खेल विभाग के अथक प्रयासों के बाद इस आइस रिंक को फिर से ऑपरेशनल बना दिया गया है। अब यह न केवल आम जनता के लिए एक आकर्षक स्थल बन गया है, बल्कि भारतीय आइस हॉकी टीम के लिए भी एक अहम अभ्यास केंद्र साबित हो रहा है। टीम इन दिनों दुबई में प्रस्तावित एशियन चैंपियनशिप की तैयारी के लिए यहीं पर अभ्यास कर रही है।
सोशल मीडिया पर छाया आइस रिंक
देहरादून की यह आइस रिंक अब युवाओं की पसंदीदा जगह बनती जा रही है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर इससे जुड़ी तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं। खेल विभाग ने इसे रोज शाम 1 घंटे के लिए आम लोगों के लिए खोल दिया है और फ्री एंट्री होने के कारण यह आम जनता के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।
भारतीय टीम के लिए ऐतिहासिक मौका
भारतीय आइस हॉकी टीम की प्रवक्ता दिस्कित अंग्मो ने बताया कि यह पहली बार है जब वे एक कृत्रिम (Artificial) आइस रिंक पर एशियाई प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले टीम को नेचुरल आइस पर ही अभ्यास करना पड़ता था, जिससे प्रदर्शन पर असर पड़ता था।
“मैंने इस रिंक को बचपन में बनते देखा था। बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन जब यह कई वर्षों तक बदहाल रहा, तो हमें निराशा हुई। अब जब यह फिर से खुला है, तो उम्मीदों को फिर से पंख लग गए हैं,” – दिस्कित अंग्मो
सोलर प्लांट से मिला स्थायी समाधान
खेल निदेशक प्रशांत आर्य ने बताया कि रिंक को दोबारा चालू करने में सबसे बड़ी बाधा इसका भारी खर्च था। इस खर्च से निपटने के लिए रिंक की छत पर दो मेगावाट का सोलर पैनल लगाया गया है, जिससे बिजली की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।
“हमने आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से टिकाऊ समाधान खोजा। अब यह रिंक लंबे समय तक संचालित रह सकेगा,” – प्रशांत आर्य
नया अध्याय शुरू
देहरादून का यह आइस रिंक न केवल उत्तराखंड के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत में आइस स्पोर्ट्स के लिए भी नई संभावनाएं खोल रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत, विभाग की दूरदर्शिता और जनता की रुचि ने मिलकर इसे एक राष्ट्रीय गौरव में बदल दिया है।
अब यह सिर्फ एक रिंक नहीं, बल्कि एक उम्मीद है — भारतीय आइस हॉकी के भविष्य की।