राजजात यात्रा की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश
देहरादून ,
उत्तराखंड के चमोली जिले के वाण गांव में स्थित लाटू देवता मंदिर के कपाट सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे विधिविधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और लाटू देवता का आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री ने मौके पर राजजात यात्रा की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को आवश्यक कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही थराली विधानसभा क्षेत्र के कुलसारी में प्रस्तावित उपजिला अस्पताल का निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की भी बात कही।
परंपराओं के साथ हुआ कपाटोद्घाटन
लाटू देवता मंदिर में पुजारी खीम सिंह ने आंखों पर पट्टी बांधकर मंदिर में प्रवेश किया और पूजा संपन्न कराई। मंदिर खुलने के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक झोड़ा और चांछड़ी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी, साथ ही देव नृत्य भी किया। पूरे क्षेत्र में लाटू देवता के जयकारे गूंज उठे और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ी।
मंदिर बना है रहस्य
लाटू देवता मंदिर की विशेषता यह है कि आज भी इसके अंदर केवल पुजारी ही आंखों पर पट्टी बांधकर प्रवेश करते हैं। मान्यता है कि मंदिर के भीतर तेज दिव्य प्रकाश या रहस्यमयी ऊर्जा है, जिससे आंखों की सुरक्षा के लिए पट्टी बांधी जाती है। श्रद्धालु मंदिर से करीब दस मीटर दूर से ही पूजा-अर्चना करते हैं।
मां नंदा के धर्म भाई हैं लाटू देवता
पौराणिक मान्यता के अनुसार लाटू देवता, मां नंदा देवी के धर्म भाई माने जाते हैं। हर बारह वर्षों में आयोजित श्री नंदा राजजात यात्रा की अगुवाई लाटू देवता के निशान के साथ की जाती है। यह यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व की हिमालयी महाकुंभ के रूप में जानी जाती है।
वाण गांव की अनूठी परंपरा
वाण गांव की एक अनोखी परंपरा यह भी है कि यहां की दुल्हनें डोली में नहीं बैठतीं। स्थानीय बुजुर्ग हीरा पहाड़ी के अनुसार, यह स्थान मां नंदा का मायका माना जाता है और यहां से ही उन्हें डोली में कैलाश के लिए विदा किया जाता है। इसलिए स्थानीय कन्याएं डोली की बजाय अन्य साधनों से ससुराल जाती हैं।
इस पावन अवसर पर कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें कृष्णा बिष्ट, हीरा पहाड़ी, डॉ. दर्शन दानू, राकेश जोशी, गबर सिंह और पान सिंह प्रमुख थे।
