देहरादून,
देहरादून में दिव्यांग असहाय बालिकाओं को आश्रय देने से इनकार करने वाली नामचीन संस्थाओं की असंवेदनशीलता पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने कड़ा रुख अपनाया है। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत पंजीकृत कई संस्थाओं ने जरूरतमंद दिव्यांग बालिकाओं को अपने केंद्रों में प्रवेश देने से इनकार कर दिया, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये संस्थाएं सेवा के नाम पर महज़ नाम और धन की लालसा तक सिमट गई हैं?
डीएम ने जताई कड़ी नाराज़गी, जांच समिति गठित
डीएम बंसल ने इस रवैये को अत्यंत गंभीर मानते हुए कहा, “जो एक दस्तखत संस्थाओं को करोड़ों का अनुदान दिला सकता है, वही एक दस्तखत उन्हें बंद भी कर सकता है।” उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो 10 प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर निर्धारित समयावधि में रिपोर्ट सौंपेगी।
पंजीकरण होते हैं सेवा के नाम पर, ज़मीनी सच्चाई कुछ और
प्रशासन को मिली शिकायतों में कहा गया है कि ये संस्थाएं सरकार व विदेशी संगठनों से भारी फंडिंग प्राप्त करती हैं, लेकिन मौके पर स्टाफ, संसाधन, विशेषज्ञ और बच्चों की संख्या दस्तावेजों के मुताबिक नहीं मिलती। यही नहीं, जब जरूरत पड़ी तो मानसिक रूप से असहाय दिव्यांग बालिकाओं के दाखिले से साफ इनकार कर दिया गया।
समाज कल्याण और प्रोबेशन अधिकारियों को चेतावनी
डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को केवल कागज़ी सिफारिशें देने की भूमिका से बाहर निकलकर, मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सख़्त एक्शन लेने का निर्देश दिया। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह सेवा केंद्र, पेशेवर व्यवसाय का अड्डा नहीं बनने दिए जाएंगे।”
जांच के दायरे में ये संस्थाएं
जांच के घेरे में आने वाली संस्थाओं में कई नामी संगठन शामिल हैं:
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बजाल इंस्टिट्यूट ऑफ लर्निंग, राजपुर रोड
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लतिका राय फाउंडेशन, बसंत विहार
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रैफल राइडर चौशायर इंटरनेशनल सेंटर, मोहनी रोड
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अरुणिमा प्रोजेक्ट विथ ऑटिज्म यूनिट, सिनोला
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यशोदा फाउंडेशन, डोईवाला
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मुशीसभा सेवा सदन, हर्बर्टपुर
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लर्निंग ट्री, धर्मपुर
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नन्ही दुनिया मूक बधिर विद्यालय, कालीदास रोड
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आशा स्कूल, गढ़ीकैंट
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वसुंधरा मानव कल्याण संस्था, देहरादून
(कुल 20 संस्थाएं जांच के दायरे में हैं)
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा है कि यदि मानवीय संवेदनाओं की आड़ में सिर्फ कागजी खानापूर्ति और व्यापार हो रहा है, तो प्रशासन ऐसे कुतंत्र को ध्वस्त करने से पीछे नहीं हटेगा। इन संस्थाओं पर यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो पंजीकरण निरस्त करने से लेकर फंडिंग पर रोक तक के कड़े कदम उठाए जाएंगे।
यह कार्रवाई प्रशासन के उस रुख को दर्शाती है जिसमें “मानव मूल्य प्रथम” रखा गया है — और यह भी कि दिव्यांग असहायों की उपेक्षा किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
