सरकारी वकीलों की मनमानी पर लगाम, कोर्ट में हार से बचाने को सरकार सख्त – uttarakhandawaaz.in

सरकारी वकीलों की मनमानी पर लगाम, कोर्ट में हार से बचाने को सरकार सख्त

मुख्य सचिव आनंद वर्धन की सख्त चेतावनी, जवाबदेही तय करने की तैयारी

देहरादून,
सरकारी मुकदमों में बार-बार हार झेल रही सरकार ने अब शासकीय अधिवक्ताओं की मनमानी पर सख्त रुख अपना लिया है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि अब कोई भी शासकीय अधिवक्ता यदि काउंटर एफिडेविट से इतर किसी तथ्य पर सहमति देता है, तो उसे उसका स्पष्ट आधार बताना होगा।

समस्या क्या है?

  • कई बार उच्च न्यायालय में बहस के दौरान सरकारी वकील ऐसे तथ्यों पर सहमति जता देते हैं जो:

    • शपथ पत्र (एफिडेविट) में शामिल नहीं होते,

    • और जिन पर सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं दिए गए होते।

  • नतीजतन केस कमजोर हो जाता है और सरकार को हार का सामना करना पड़ता है।

  • आदेश के खिलाफ अपील करना भी मुश्किल हो जाता है।

अब क्या बदलाव होगा?

  • शासकीय अधिवक्ता को सहमति जताने से पहले कारण और आधार दर्ज करना अनिवार्य होगा।

  • मुख्य स्थायी अधिवक्ता कार्यालय में एक ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें:

    • केस की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी,

    • शपथ पत्र, पत्राचार और उच्च न्यायालय के आदेश तक सब ऑनलाइन उपलब्ध होगा।

  • यह व्यवस्था फौजदारी और सिविल दोनों प्रकार के मामलों में लागू की जाएगी।

महत्त्व क्यों है?
यह कदम सरकारी मामलों में पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। साथ ही मनमाने रवैये पर लगाम लगेगी और अदालतों में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सकेगा।

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