देहरादून ,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निर्देश राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। श्रीमद् भगवत गीता का पाठ्यचर्या में समावेश करने का विचार विशेष रूप से बच्चों को नैतिक शिक्षा और जीवन के सही मूल्यों के बारे में समझने में मदद करेगा। यह शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है, जहां बच्चों के मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक विकास को प्राथमिकता दी जाती है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री द्वारा दी गई अन्य निर्देशों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जैसे कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण, छात्रों के लिए आवासीय हॉस्टल की सुविधाएं, और बच्चों को समय पर पाठ्यपुस्तकें मुहैया कराना।
स्कूलों में एनसीसी और एनएसएस को बढ़ावा देने, छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और राज्य के औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सी.एस.आर. फंड के तहत सहयोग लेने जैसे कदमों से राज्य में शिक्षा के स्तर में और सुधार होगा। इसके अलावा, जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों की मरम्मत और विद्यार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने कई जरूरी निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत, लोककथाएँ, संगीत, कला, पर्यावरणीय शिक्षा, और कौशल विकास को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जिससे बच्चों को एक समग्र शिक्षा मिल सके। यह कदम राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।