भाकपा माले का मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन प्रेषित
देहरादून,
भाकपा माले के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने ईमेल और व्हाट्स ऐप ग्रुप के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार को ज्ञापन प्रेषित किया है। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि व्हाट्स ऐप ग्रुप में सांप्रदायिक घृणा भरे संदेश प्रसारित करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि उत्तराखंड में सांप्रदायिक उन्माद की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है और आम तौर पर उम्मीद की जाती है कि पुलिस किसी भी तरह के उन्माद की घटनाओं पर रोक लगायेगी, कानून व्यवस्था कायम करेगी और पीड़ित या असुरक्षित व्यक्ति जिस भी धर्म का हो, उसे सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि लेकिन इधर यह देखने में आया है कि पुलिस के कतिपय कर्मी भी सांप्रदायिक विद्वेष और धार्मिक घृणा की चपेट में हैं। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि यूके वन टू तेरह उत्तराखंड पुलिस नाम के व्हाट्स ऐप ग्रुप में अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध बेहद घृणा भरे मैसेज भेजे गए चैट का स्क्रीन शॉट संलग्न है कि जानकारी के अनुसार यह मैसेज उसी दिन भेजे गए जिस दिन घाट (नंदानगर) में नाई का काम करने वाले एक अल्पसंख्यक समुदाय के युवक पर एक लड़की को अश्लील इशारे करने के आरोप के बाद उन्मादी भीड़, अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों और दुकानों पर हमला कर रही थी। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि उस दिन एक तरफ सोशल मीडिया में चमोली पुलिस, असामाजिक तत्वों के द्वारा फैलाये जा रहे घृणा और अफवाह के संदेशों के खिलाफ शांति और सौहार्द की अपील का रही थी, उत्पात करने वालों पर मुकदमा दर्ज कर रही थी, वहीं दूसरी ओर पुलिस जवानों के व्हाट्स ग्रुप में सांप्रदायिक घृणा से भरे मैसेज भेजे जा रहे थे। उन्होंने ज्ञापन में कहा है कि पुलिस एक अनुशासित बल है, जिससे कानून और संविधान के अनुसार चलने की अपेक्षा की जाती है और पुलिस के आचार व्यवहार के लिए आचरण नियमावली निर्धारित है, लेकिन पुलिस के उक्त व्हाट्स ऐप ग्रुप के चैट पढ़कर ऐसा लगता है कि यह किसी अनुशासित और कानून के अनुपालन करवाने वाले बल का नहीं बल्कि सांप्रदायिक घृणा के जहर से भरे हुए बलवाइयों का ग्रुप है। उन्होंने ज्ञापन में कहा कि पुलिस और सांप्रदायिक बलवाइयों के बीच की रेखा ही मिट जाए तो प्रदेश में न तो नागरिक सुरक्षित रह सकते हैं, न कानून व्यवस्था और ऐसे पुलिस कर्मियों से तो समूचे पुलिस के तंत्र को भी गंभीर खतरा है। ज्ञापन में कहा गया कि यह हैरत की बात है कि हिंदी- अंग्रेजी कुछ समाचार पत्रों और पोर्टल्स में उक्त व्हाट्स ऐप चैट सार्वजनिक होने के बावजूद दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। अलबत्ता उक्त व्हाट्स ऐप ग्रुप में स्क्रीनशॉट सार्वजनिक करने वालों का इलाज करने की बातें लिखी गयी।