भाजपा और आरएसएस के लोगों ने भारत का संविधान नहीं कबूलाः करन माहरा – uttarakhandawaaz.in

भाजपा और आरएसएस के लोगों ने भारत का संविधान नहीं कबूलाः करन माहरा

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने देशभर में आर्थिक मैपिंग एवं जातिगत जनगणना को बताया जरूरी
देहरादून ,

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि भाजपा और आरएसएस के लोगों ने भारत का संविधान नहीं कबूला है वहीं देशभर में आर्थिक मैपिंग एवं जातिगत जनगणना कराये जाने की जरूरत है लेकिन केन्द्र सरकार इस ओर कोई पहल नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने देश के उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ रुपए के कर्ज माफ किये है लेकिन किसानों का कर्जा माफ नहीं किया जा रहा है और भाजपा की केन्द्र सरकार दोहरा चरित्र अपना रही है जिसका पुरजोर विरोध किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी, ब्यूरोक्रेसी और प्राइवेट सेक्टर में सबका बराबरी की भागीदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की हिटलरशाही, चुनावी बाॅड के नाम पर किये गये महा भ्रष्टाचार, लोकसभा चुनावों में धार्मिक धु्रवीकरण के लिए लागू किये गये सीएए तथा जातिगत जनगणना न कराये जाने पर जनता का ध्यान आकर्षित करते हुए केन्द्र की मोदी सरकार की पोल खोली है। इस अवसर पर करन माहरा ने कहा कि जिस भाजपा-आरएसएस ने आज तक संविधान को पूर्णतः नहीं स्वीकारा है। उन्होंने कहा कि वह आरक्षण पर सवाल उठाते हैं। दलितों, आदिवासियों व पिछड़े वर्गों का अधिकार छीनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बहुत ही गंभीर व चिंताजनक बात है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सांसद के ‘संविधान बदलने’ वाले बयान पर नरेंद्र मोदी की चुप्पी खतरनाक है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव दो विचारधाराओं के बीच है संविधान या संघविधान, सामाजिक न्याय या शोषण, धर्मनिरपेक्षता या सांप्रदायिकता, नागरिक अधिकार या बेबस जनता, बोलने की आजादी या डर भरी चुप्पी, मोहब्बत या नफरत, विविधता या एकाधिकार, न्यायपूर्ण व्यवस्था या तानाशाही अन्याय है। इस अवसर पर करन माहरा ने कहा कि आजादी के संघर्ष से मिली भारत की सबसे कीमती धरोहर, संविधान को बदलने का मतलब देश को गुलामी की ओर धकेलना है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का फैसला अब आपके हाथों में है। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद का यह बयान कि उन्हें 400 सीट संविधान बदलने के लिए चाहिए, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ‘संघ परिवार’ के छिपे हुए मंसूबों का सार्वजनिक ऐलान है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और भाजपा का अंतिम लक्ष्य संविधान निर्माता बाबा साहेब के संविधान को खत्म करना है। उन्हें न्याय, बराबरी, नागरिक अधिकार और लोकतंत्र से नफरत है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटना, मीडिया को गुलाम बनाना, अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा और स्वतंत्र संस्थाओं को पंगु बनाकर विपक्ष को मिटाने की साजिश से वो भारत के महान लोकतंत्र को संकीर्ण तानाशाही में बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम आजादी के नायकों के सपनों के साथ ये षड्यंत्र सफल नहीं होने देंगंे और अंतिम सांस तक संविधान से मिले लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की 39 प्रत्याशियों की सूची में 61 प्रतिशत अनुसूचित जाति,जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने कहा कि 31 प्रतिशत 50 वर्ष से कम आयु के युवा हैं तथा 52 प्रतिशत 60 वर्ष से कम आयु वर्ग के हैं। इस अवसर पर जातिगत जनगणना पर बोलते हुए करन माहरा ने कहा कि क्या हमने कभी सोचा है कि गरीब कौन हैं कितने हैं किस स्थिति में है और क्या इन सभी की गिनती जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में हुई जातिगत जनगणना से पता चला कि गरीब आबादी के 88 प्रतिशत लोग दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज से आते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार से आए आंकड़े देश की असली तस्वीर की एक छोटी सी झलक मात्र हैं, हमें अंदाजा तक नहीं है कि देश की गरीब आबादी किस हाल में जी रही है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने पर दो ऐतिहासिक कदम उठायेगी। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना, आर्थिक मैपिंग, जिसके आधार पर हम 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा को समाप्त कर सकेंगें। उन्होंने कहा कि यह कदम देश का एक्सरे कर सभी को सही आरक्षण, हक और हिस्सेदारी दिलाएगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ गरीब के लिए सही नीतियां और योजनाएं बनाई जा सकेंगी बल्कि उन्हें पढ़ाई, कमाई और दवाई के संघर्ष से उबार कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा भी जा सकेगा। उन्होंने कहा कि गिनती करो हमारा नारा है, क्योंकि गिनती न्याय की पहली सीढ़ी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि सत्ता में आने पर कंाग्रेस पार्टी दो काम करेगी। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना तथा आर्थिक सर्वे ताकि लोगों को पता चले कि देश की संस्थाओं में उनकी कितनी हिस्सेदारी है तथा उनके हाथ में देश का कितना धन है।

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