गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्रों के बलिदान की गाथा अतुलनीय घटनाः सूर्यकांत

देश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने चारों शहीद साहिबजादों को दी श्रद्धांजलि
देहरादून ,

दुनिया के इतिहास में सिख पंथ के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह के चार पुत्रों के बलिदान की गाथा अतुलनीय घटना है जो अविश्वसनीय लगती है किंतु सत्य है। आज यह बात आज प्रेमनगर बाजार में आयोजित श्रद्धाजंलि कार्यक्रम में लंगर की सेवा करने पहुंचे उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने चारों शहीद साहिबजादों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अल्प वयस्क बाबा अजित सिंह 17 वर्ष बाबा जुझावर सिंह 13 वर्ष बाबा जोरावर नौ वर्ष व बाबा फतेह सिंह सात वर्ष जिस प्रकार से मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए शहीदी को प्राप्त हुए वो दुनिया में बेमिसाल है। उन्होंने कहा कि आजकल जिन नौ साल व सात साल के बच्चों को ठीक से बोलना भी नहीं आता उस उम्र में मुगलों की क्रूरता का बहादुरी व निडरता से सामना करते हुए ठंडे मीनार पर नंगे बदन ठंड का मुकाबला करते हुए भी अपने धर्म को त्याग कर इस्लाम कुबूल न करना और फिर जिंदा दीवार पर चिनवाया जाना कुबूल करना ऐसा पूरे संसार में त्याग व बलिदान का उदाहरण नहीं मिलता है। धस्माना ने कहा कि गंगू ब्राह्मण ने इनाम के लालच में माता गुजरी व दोनों छोटे साहिबजादों को मुखबिरी कर धोखे से मुगलों के हाथों पकड़वा दिया किंतु धन दौलत व जागीर का लालच दे कर भी वजीर खान माता गुजरी व दोनों साहिबजादों का ईमान नहीं खरीद सका और उसने बहादुर बाबा जोरावर व बाबा फतेह सिंह को जिंदा दीवार पर चिनवा दिया व माता गुजरी भी इस सदमें से शहीद हो गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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