देहरादून,
उत्तराखंड में प्रस्तावित 1320 मेगावाट आरटीसी (कोयला आधारित) बिजली की दीर्घकालिक खरीद को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के बीच प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृतियों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। UERC के रिकॉर्ड में 1320 मेगावाट आरटीसी कोयला आधारित बिजली की दीर्घकालिक खरीद से संबंधित प्रस्ताव और निविदा शर्तों में संशोधन के मामलों का उल्लेख भी दर्ज है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि बिजली खरीद का उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक और बढ़ती बिजली आवश्यकता को पूरा करने के लिए बेस-लोड बिजली की व्यवस्था करना है। उनके अनुसार, अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
RFQ चरण में पांच कंपनियां योग्य
डॉ. सुंदरम के अनुसार, यह कहना सही नहीं है कि बिजली खरीद बिना प्रतिस्पर्धा के किसी एक कंपनी को दी जा रही है। उनके मुताबिक Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गईं और इसके बाद Request for Proposal (RFP) प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा जारी है। अंतिम चयन बोली प्रक्रिया के परिणाम के आधार पर किया जाएगा।
इस मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 17 सितंबर को निविदा शर्तों में बदलाव और प्रस्तावित दीर्घकालिक बिजली खरीद को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस की ओर से यह आरोप लगाया गया कि निविदा की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए और इससे एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचने की स्थिति बनी।
देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर संयंत्र लगाने का विकल्प
प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि उत्तराखंड पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य है और थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। लंबी दूरी तक कोयला पहुंचाने से परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित करने पर कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी उत्तराखंड में संयंत्र लगाकर प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया में भाग ले सकती है।
ट्रांसमिशन लागत का आकलन कुल टैरिफ के आधार पर
डॉ. सुंदरम ने कहा कि बिजली उत्पादन स्थल से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन व्यवस्था और उसकी लागत निविदा तथा टैरिफ की शर्तों के अनुसार तय होगी। उनके अनुसार, केवल उत्पादन संयंत्र के किसी दूसरे राज्य में होने के आधार पर उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। वास्तविक प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ और अनुबंध की शर्तों के आधार पर होगा।
Fixed Charge सीमा 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत
प्रमुख सचिव ने बताया कि Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। बोलीदाताओं की लागत, ईंधन की उपलब्धता और संभावित संयंत्र स्थलों की परिस्थितियों को देखते हुए UPCL ने Fixed Charge की सीमा 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था, जिससे Fuel Charge को 25 प्रतिशत तक रखने की व्यवस्था हो सके।
उन्होंने कहा कि बिजली की कीमत का आकलन केवल Fixed Charge से नहीं, बल्कि Fixed Charge और Variable/Fuel Cost से बनने वाले कुल टैरिफ के आधार पर किया जाता है। इस प्रस्ताव को UERC के समक्ष रखा गया और आयोग के स्तर पर विचार-विमर्श के बाद संबंधित संशोधन को मंजूरी दी गई। UERC की आधिकारिक वेबसाइट पर 1320 मेगावाट आरटीसी कोयला आधारित बिजली की खरीद और RFP/PSA की विशिष्ट शर्तों में संशोधन से संबंधित कार्यवाही दर्ज है।
पहली यूनिट 42 और दूसरी 48 माह में उपलब्ध कराने का लक्ष्य
राज्य की बिजली आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए परियोजना को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की गई है। इसके तहत पहली यूनिट के लिए 42 माह और दूसरी यूनिट के लिए 48 माह की समयसीमा रखे जाने की बात प्रमुख सचिव ने कही।
UJVNL-THDC संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी हुआ विचार
प्रमुख सचिव के अनुसार, 1320 मेगावाट बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था। हालांकि विभिन्न नीतिगत और संस्थागत परिस्थितियों के कारण यह विकल्प आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद राज्य की दीर्घकालिक बिजली आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से बिजली खरीद का विकल्प अपनाया गया।
25 वर्ष की अवधि में संभावित भुगतान का अनुमान
डॉ. सुंदरम ने कहा कि 25 वर्षों के लिए लगभग ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का उल्लेख एकमुश्त भुगतान नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक अनुबंध अवधि में संभावित कुल भुगतान का अनुमान है। उन्होंने बताया कि राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है।
उनके अनुसार, वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, वास्तविक बिजली आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता और अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।
UERC की निगरानी में आगे बढ़ी प्रक्रिया
प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि निविदा प्रक्रिया के दौरान कंपनियों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक परीक्षण किया गया। संबंधित प्रस्तावित बदलावों को UERC के समक्ष रखा गया और आयोग की प्रक्रिया के बाद उन्हें आगे बढ़ाया गया। UERC के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस खरीद के लिए 2025 से RFQ संबंधी संशोधन तथा 2026 में 1320 मेगावाट खरीद की स्वीकृति और RFP/PSA में बदलाव से जुड़ी कार्यवाही दर्ज है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद का उद्देश्य राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता को सुरक्षित करना है। उन्होंने दोहराया कि अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को तकनीकी आवश्यकता, प्रतिस्पर्धा तथा नियामकीय स्वीकृतियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
