देहरादून ,
भाजपा के केंद्रीय संगठन के पुनर्गठन में उत्तराखंड को अहम प्रतिनिधित्व मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी, महेंद्र पांडे और आलोक भट्ट को केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारों नेताओं को बधाई देते हुए उनके नए दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद संगठनात्मक राजनीति में अपेक्षाकृत पीछे नजर आ रहे तीरथ सिंह रावत की यह नियुक्ति उनकी राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण वापसी के तौर पर देखी जा रही है।
वहीं सांसद अनिल बलूनी को एक बार फिर मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। केंद्रीय भाजपा में यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है। खास बात यह है कि सोशल मीडिया विंग के प्रमुख अमित मालवीय को जिम्मेदारी से हटाए जाने के बाद संगठन में बलूनी की भूमिका और महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा महेंद्र पांडे को कार्यालय प्रभारी और आलोक भट्ट को सोशल मीडिया विंग का सह-संयोजक बनाया गया है। उत्तराखंड से चार नेताओं को केंद्रीय संगठन में जगह मिलने के बाद प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्या अनिल बलूनी को मिल सकता है केंद्रीय मंत्रिमंडल में मौका?
केंद्रीय संगठन में अनिल बलूनी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मोदी मंत्रिपरिषद में भविष्य में फेरबदल होता है तो क्या उत्तराखंड से बलूनी को केंद्रीय मंत्री बनने का अवसर मिलेगा। फिलहाल उत्तराखंड से अजय टमटा केंद्रीय राज्यमंत्री हैं।
उत्तराखंड से लोकसभा में अनिल बलूनी के अलावा अजय भट्ट, त्रिवेंद्र सिंह रावत और महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह भी सांसद हैं। ऐसे में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल में उत्तराखंड से किसी नए चेहरे को मौका मिलने की संभावनाओं पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में होने वाले फैसलों को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना आसान नहीं है। इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि अनिल बलूनी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या उन्हें संगठन में ही अपनी भूमिका जारी रखनी होगी।
CM धामी की भूमिका भी अहम
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल में उत्तराखंड से किसी नए चेहरे को शामिल किए जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री धामी की राय को भी अहम माना जा सकता है। राज्य में भाजपा सरकार के प्रदर्शन और संगठन के साथ धामी के मजबूत समन्वय को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
फिलहाल भाजपा के केंद्रीय संगठन में उत्तराखंड के चार नेताओं को मिली जिम्मेदारी ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह संगठनात्मक बदलाव ही अंतिम तस्वीर है या आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में भी उत्तराखंड को कोई नया प्रतिनिधित्व मिलता है।