सहसपुर की महिलाओं ने संभाली तिरंगे की कमान, सिलाई यूनिट में तैयार हो रहे राष्ट्रीय ध्वज

देहरादून ,
स्वतंत्रता दिवस और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर देहरादून जिले के सहसपुर ब्लॉक की ग्रामीण महिलाएं राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) के तहत स्थापित सिलाई यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं बड़े स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, सहसपुर में स्थापित इस सिलाई यूनिट में वर्तमान में 15 से 20 महिलाएं तिरंगे बनाने के कार्य में जुटी हैं। ये महिलाएं पूर्व में भी 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के लिए राष्ट्रीय ध्वज तैयार करती रही हैं। हालांकि, सिलाई यूनिट स्थापित होने के बाद इस बार बड़े पैमाने पर तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं।

हर घर तिरंगा अभियान से बढ़ी मांग

आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे तिरंगों की मांग ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के चलते बढ़ी है। समूह की महिलाओं से राष्ट्रीय ध्वज खरीदे भी जा रहे हैं। जिला प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय बाजार में भी इन तिरंगों की अच्छी मांग बताई जा रही है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में रीप और एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अपने पसंदीदा क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए महिलाएं अलग-अलग आकार के राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन भी इन समूहों से तिरंगे खरीद रहा है, जबकि स्थानीय बाजार में भी इनकी मांग बनी हुई है।

तिरंगे की बिक्री से महिलाओं की आय में इजाफा

सीडीओ ने बताया कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण तिरंगे खरीद रहे हैं। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके हुनर को बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद कर रही है।

राष्ट्रीय उत्सव के साथ स्वरोजगार का अवसर

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि रीप परियोजना के सहयोग से ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी करने के साथ-साथ राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर आय भी अर्जित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं केवल स्वरोजगार स्थापित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय पर्वों में भी अपनी प्रतिभा और योगदान से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सहसपुर की सिलाई यूनिट में तैयार हो रहे तिरंगे इस बात का उदाहरण हैं कि राष्ट्रभक्ति और महिला सशक्तिकरण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

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