बैठक में आईटी/ओटी, बिलिंग, SCADA, ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर में विद्युत लाइनों का भूमिगतकरण, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की सीमा चौकियों का विद्युतीकरण, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों का विद्युतीकरण और प्रदेश के सभी 14 विद्युत वितरण मंडलों में प्रणाली सुदृढ़ीकरण से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
आईटी/ओटी बिलिंग सिस्टम को यूजर फ्रेंडली बनाने के निर्देश
आईटी/ओटी बिलिंग परियोजना की समीक्षा के दौरान एमडी पीसी ध्यानी ने सॉफ्टवेयर मॉड्यूल को अधिक यूजर फ्रेंडली बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सॉफ्टवेयर में बदलाव या कार्य शुरू करने से पहले क्षेत्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों से परामर्श लिया जाए।
उन्होंने फील्ड यूजर्स की ट्रेनिंग को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए UPCL की अपनी आईटी टीम तैयार करने को कहा, ताकि भविष्य में आईटी संबंधी कार्यों के लिए निगम के पास पर्याप्त वैकल्पिक मानव संसाधन उपलब्ध रहे। उन्होंने परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए प्रत्येक स्तर पर समुचित प्रयास सुनिश्चित करने को कहा।
नवंबर 2026 तक भूमिगत होंगी गंगा कॉरिडोर की बिजली लाइनें
ऋषिकेश के गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण से जुड़े सभी 7 पैकेजों की विस्तृत समीक्षा की गई। एमडी ने सभी सात कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी कुंभ को देखते हुए नवंबर 2026 तक सभी कार्य पूरे किए जाएं।
उन्होंने इसके लिए निश्चित कार्ययोजना के अनुसार काम करने और विभागीय स्तर पर GTP अनुमोदन, सामग्री निरीक्षण तथा DI जैसी प्रक्रियाओं को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को इन कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाने को कहा गया।
SCADA परियोजना अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य
ऋषिकेश-हरिद्वार और देहरादून क्षेत्र में चल रही SCADA परियोजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान परियोजना के विभिन्न घटकों की वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यों और निर्धारित समय सीमा पर चर्चा हुई।
कार्य में धीमी प्रगति पर एमडी ने नाराजगी जताते हुए कार्यदायी संस्था को तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिथिलता जारी रहने पर संबंधित फर्म को नोटिस जारी किया जाए। साथ ही फैक्ट्री इंस्पेक्शन टेस्ट से संबंधित दस्तावेज और फैक्ट्री इंस्पेक्शन का कार्य अगस्त 2026 में ही पूरा करने के निर्देश दिए गए।
SCADA से जुड़े फील्ड कार्यों को भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि पूरी परियोजना अक्टूबर 2026 तक पूरी की जा सके। एमडी ने अधिकारियों को लगातार निगरानी और समीक्षा करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी बॉटलनेक के कारण काम प्रभावित हो रहा हो तो इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को दी जाए।
लॉस रिडक्शन कार्य सितंबर तक 100 प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य
बिजली के तकनीकी नुकसान को कम करने के लिए चल रहे लॉस रिडक्शन कार्यों की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में लगभग 63 प्रतिशत भौतिक प्रगति के सापेक्ष इसे सितंबर 2026 तक 100 प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
एमडी ने कार्यदायी संस्थाओं को पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। सभी अधिशासी अभियंताओं को कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर समय सीमा में काम पूरा कराने तथा अधीक्षण अभियंताओं को नियमित समीक्षा कर आवश्यक सहयोग देने को कहा गया।
₹3,000 करोड़ से अधिक के बिजली सुधार कार्य
आरडीएसएस योजना के तहत उत्तराखंड में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए ₹3,000 करोड़ से अधिक के विकास कार्य किए जा रहे हैं। इनमें स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग, बिजली लाइनों का भूमिगतकरण, सीमावर्ती क्षेत्रों और सुरक्षा बलों की चौकियों का विद्युतीकरण, लॉस रिडक्शन और SCADA ऑटोमेशन जैसे कार्य शामिल हैं।
राज्य में करीब 15.84 लाख घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी मिलने और बिजली चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर में करीब ₹547.73 करोड़ की लागत से हाईटेंशन और लो-टेंशन विद्युत लाइनों को भूमिगत करने का कार्य चल रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बिजली पहुंचाने पर जोर
उत्तरकाशी की नेलांग घाटी में सेना और ITBP की अग्रिम चौकियों को मुख्य ग्रिड से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए कोपांग में विद्युत सब-स्टेशन और 33 केवी लाइन से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं, जिससे अग्रिम चौकियों की डीजल जनरेटर पर निर्भरता कम होगी।
वहीं वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों और जनजातीय परिवारों के घरों एवं सार्वजनिक संस्थानों तक बिजली पहुंचाने का काम किया जा रहा है। अल्मोड़ा में करीब ₹76.49 करोड़ की लागत से विद्युत नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है, जिसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हल्द्वानी में करीब ₹107.01 करोड़ और रानीखेत में ₹69.55 करोड़ की लागत से तकनीकी बिजली नुकसान कम करने के लिए विद्युत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
एमडी पीसी ध्यानी ने सभी अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निगम को अनुदान की धनराशि का किसी भी स्थिति में नुकसान न हो।
समाचार लिखे जाने तक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की सीमा चौकियों तथा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गांवों के विद्युतीकरण से जुड़े कार्यों की समीक्षा जारी थी।