देहरादून ,
कभी अपनी अनूठी खुशबू और उत्कृष्ट स्वाद के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध रही दून बासमती चावल की खेती अब एक बार फिर उत्तराखंड में नई उम्मीदों के साथ लौट रही है। उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन और किसानों के संयुक्त प्रयासों से इस पारंपरिक धान की खेती को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष के सफल ट्रायल के बाद इस वर्ष दून बासमती की खेती का दायरा बढ़ाकर 75 हेक्टेयर कर दिया गया है। इस अभियान से जिले के लगभग 160 किसान जुड़ चुके हैं। पहले यह पहल केवल सहसपुर और विकासनगर तक सीमित थी, लेकिन अब रायपुर और डोईवाला के किसान भी इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
पिछले वर्ष हुए ट्रायल के दौरान किसानों से 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान ₹65 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। इसके एवज में 13 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई। इस सफल पहल से किसानों का विश्वास बढ़ा है और इस वर्ष खेती का रकबा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
दून बासमती के संरक्षण और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विकासनगर में सीड बैंक और आधुनिक टेस्टिंग सुविधा विकसित की जा रही है। इसके साथ ही बीज संरक्षण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान इसी तरह निरंतर जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दून बासमती एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकती है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध कृषि विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।