डीजीपी उत्तराखंड की अपराध व कानून व्यवस्था पर हाई-लेवल समीक्षा बैठक

लापरवाही, लैंड फ्रॉड व भ्रष्टाचार पर सख़्त रुख, कई पुलिसकर्मी निलंबित

देहरादून ,

पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में आज सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय अपराध एवं कानून व्यवस्था समीक्षा गोष्ठी आयोजित की गई। बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गढ़वाल एवं कुमाऊँ रेंज प्रभारी, समस्त जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक तथा एसटीएफ के अधिकारी सम्मिलित हुए।

बैठक के दौरान वर्तमान अपराध परिदृश्य, कानून व्यवस्था की स्थिति, विवेचनाओं की प्रगति एवं जनशिकायतों के निस्तारण की गहन समीक्षा करते हुए पुलिस महानिदेशक द्वारा सख़्त दिशा-निर्देश जारी किए गए।

गंभीर मामलों में लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई
हाल ही में जनपद देहरादून के ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या की घटना में लापरवाही बरतने पर एम्स चौकी प्रभारी एसआई साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। वहीं कोतवाली नगर, देहरादून क्षेत्र में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी एसआई प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित किया गया है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों मामलों की जांच एसपी क्राइम श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है। अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका की जांच कर 7 दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को देने के निर्देश दिए गए हैं।

हरिद्वार गोलीबारी प्रकरण में भी निलंबन
जनपद हरिद्वार के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान दो पक्षों में हुए संघर्ष एवं गोलीबारी की घटना में गंभीर लापरवाही पर हल्का प्रभारी चुड़ियाला एसआई सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक क्राइम, हरिद्वार श्री जितेन्द्र मेहरा को सौंपी गई है। अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर 7 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

लैंड फ्रॉड मामलों में सीओ स्तर पर अनिवार्य जांच
ऊधमसिंहनगर जनपद के सुखवन्त सिंह आत्महत्या प्रकरण के संदर्भ में भूमि संबंधी मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर उठे आरोपों के मद्देनज़र डीजीपी ने निर्देश दिए कि सभी लैंड फ्रॉड मामलों में क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर समयबद्ध, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच अनिवार्य होगी। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि मामला सिविल है या आपराधिक, उसके बाद ही अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। लम्बित भूमि विवादों की पुलिस मुख्यालय स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
माननीय मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत डीजीपी ने सतर्कता विभाग को निर्देश दिए कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिस कर्मियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख़्त एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक/निदेशक विजिलेंस, अपराध एवं कानून व्यवस्था श्री वी. मुरुगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन श्री ए.पी. अंशुमान, सहित गढ़वाल व कुमाऊँ परिक्षेत्र, साइबर, दूरसंचार, अभिसूचना, अपराध एवं कानून व्यवस्था तथा कार्मिक शाखा के पुलिस महानिरीक्षक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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