थाईलैंड–म्यांमार में बंधक बनाकर कराई जा रही थी साइबर ठगी | रेस्क्यू अभियान में 7 युवक सुरक्षित लौटे | एजेंट गिरफ्तार

देहरादून / उधम सिंह नगर ,
थाईलैण्ड, म्यांमार और बैंकॉक में नौकरी के नाम पर भेजे गये भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। भारत सरकार एवं विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त रेस्क्यू अभियान के तहत कई भारतीयों को वापस लाया गया, जिनमें उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद के 7 युवक शामिल हैं।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह (IPS) ने जानकारी देते हुए बताया कि लौटकर आये पीड़ित युवकों से की गई गहन पूछताछ में पता चला कि जनपद में कुछ दलाल / एजेंट विदेशी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जो युवाओं को उच्च वेतन वाली नौकरी का लालच देकर मोटी रकम लेकर विदेश भेजते थे, लेकिन वहाँ उन्हें जबरन साइबर ठगी करने के काम में लगा दिया जाता था।

जांच में सामने आए नामों में —
सुनील कुमार, अशोक, पिंकी, नीरव चौधरी, प्रदीप (निवासी काशीपुर/जसपुर, उधम सिंह नगर) तथा धनंजय (निवासी महाराष्ट्र) शामिल हैं।


डिजिटल सबूतों के आधार पर प्रदीप गिरफ्तार

सहायक पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम कुश मिश्रा (IPS) के पर्यवेक्षण में एजेंटों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप चैट एवं सोशल मीडिया डेटा के लिए संबंधित बैंकों और कंपनियों को पत्र भेजे गए।
डेटा विश्लेषण में सामने आया कि युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर बड़ी धनराशि वसूली गई, तथा व्हाट्सएप के माध्यम से युवाओं का डाटा विदेशी एजेंटों को भेजा गया।

तफ्तीश के दौरान डिजिटल साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर अभियुक्त प्रदीप कुमार को उसके आवास शिवनगर कालोनी, काशीपुर से गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में अभियुक्त ने कबूला कि—

  • उसने पीड़ित अयाज को बैंकॉक में डिजिटल मार्केटिंग की नौकरी का झांसा देकर भेजा

  • दलाल मनीष चौहान (दड़ियाल, काशीपुर) से कुल 45,000 रुपये कमीशन प्राप्त किया

  • बाद में मनीष ने ही अयाज को बैंकॉक से अवैध रास्तों से म्यांमार (KK Park) पहुंचाया

  • वहीं से पीड़ितों से जबरन साइबर ठगी कराई जा रही थी

अभियुक्त से मिले मोबाइल से महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट डेटा प्राप्त किया गया है, जिसका विश्लेषण जारी है। आरोपी के खिलाफ BNS व IT अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।


अपराध का तरीका (Modus Operandi)

  • युवाओं का चयन सोशल मीडिया व व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से

  • विदेश में बड़ी सैलरी की नौकरी का झांसा

  • पासपोर्ट, दस्तावेज और व्हाट्सएप पर निजी डाटा विदेशी एजेंटों को शेयर

  • बड़ी रकम वसूली

  • विदेश पहुंचते ही अज्ञात रास्तों से KK Park (म्यांमार) ले जाकर बंधक बनाना

  • चीनी एजेंट व टीम लीडरों द्वारा जबरन साइबर फ्रॉड कराना

  • विभिन्न देशों की ऑनलाइन वर्किंग साइटें हैक कर ठगी के लिए फर्जी चैटिंग करवाना


एसटीएफ की अपील

विदेश में नौकरी के लिए निजी एजेंटों पर भरोसा न करें।
सिर्फ भारत सरकार द्वारा अधिकृत मार्गों से ही विदेश जाएं।
संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या 112 पर दें।

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