मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस दीपावली स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और स्वदेशी उत्पाद निर्माताओं को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि जब हम अपने गांव या कस्बों में बने दीये या अन्य स्वदेशी वस्तुएं खरीदते हैं, तो हम किसी परिवार की आजीविका और उसकी मेहनत का सम्मान करते हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। स्वदेशी उत्पादों की खरीद से स्थानीय शिल्प, कुटीर उद्योगों और महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा लाभ मिलता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड के कारीगरों की परंपरा और कौशल समृद्ध हैं। मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री, जैविक उत्पाद और पहाड़ी खाद्य पदार्थ न केवल स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हर नागरिक यह संकल्प ले कि इस दीपावली अपने घरों को स्वदेशी उत्पादों से ही रोशन करे, ताकि किसी अन्य परिवार के घर में भी खुशियों के दीप जल सकें। हमारी छोटी-छोटी खरीदारी किसी के जीवन में नई उम्मीद की किरण बन सकती है।”
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को दीपावली, धनतेरस और भैयादूज की शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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