देहरादून में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने थाईलैंड को दी चैंपियनशिप ट्रॉफी
देहरादून।
देवभूमि उत्तराखंड ने पहली बार शीतकालीन खेलों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी कर इतिहास रचा। शनिवार को रायपुर स्थित हिमाद्री आइस रिंक (रजत जयंती खेल परिसर) में आयोजित एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2025 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की और चैंपियनशिप ट्रॉफी थाईलैंड को प्रदान की।
प्रतियोगिता की झलकियां
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एशिया के 11 देशों से 200 से अधिक खिलाड़ी शामिल हुए।
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खिलाड़ियों ने 9 प्रतिस्पर्धाओं में अपना कौशल दिखाया।
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भारत के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 4 स्वर्ण समेत कई पदक जीते।
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अंततः थाईलैंड ने चैंपियनशिप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
मुख्यमंत्री धामी के संबोधन की मुख्य बातें
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यह प्रतियोगिता भारत में शीतकालीन खेलों के नए युग की शुरुआत है।
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राज्य में 517 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक स्टेडियम और लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरण उपलब्ध कराए गए।
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38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने उत्तराखंड को “देवभूमि के साथ खेलभूमि” के रूप में भी पहचान दिलाई।
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स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान के तहत 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी।
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प्रदेश में प्रथम खेल विश्वविद्यालय और महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं।
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4% खेल कोटे को पुनः लागू किया गया।
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पदक विजेता खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी दी जा रही है।
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खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री खेल विकास निधि, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल किट योजना, और खेल रत्न पुरस्कार जैसे कार्यक्रम लागू।
हिमाद्री आइस रिंक – देश की शान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से बंद पड़ी हिमाद्री आइस रिंक का जीर्णोद्धार कर खिलाड़ियों को समर्पित किया गया है। यह देश की एकमात्र ओलिंपिक स्टैंडर्ड आइस रिंक है, जिसमें प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। 14 वर्षों बाद यहां अंतर्राष्ट्रीय खेल का आयोजन पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।
समारोह में मौजूद रहे
इस अवसर पर विशेष सचिव अमित सिन्हा, आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अमिताभ शर्मा, एशियन स्केटिंग यूनियन, उत्तराखंड आइस स्केटिंग एसोसिएशन के पदाधिकारी, आयोजक, खेल विभाग के अधिकारी, प्रशिक्षक, खिलाड़ी और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
📌 उत्तराखंड ने एक बार फिर साबित किया है कि वह न केवल धार्मिक और पर्यटन केंद्र है, बल्कि अब तेजी से “खेलभूमि” के रूप में भी उभर रहा है।