हरिद्वार ,
भादो अमावस्या के पावन अवसर पर आज हरिद्वार की पवित्र हर की पौड़ी पर भोर से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह 4:00 बजे से ही गंगा स्नान की परंपरा निभाने के लिए देशभर से आए भक्त गंगा तट पर जुटने लगे।
कुशा व्रत घाट और नारायणी शिला पर विशेष अनुष्ठान
स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने कुशा व्रत घाट और नारायणी शिला पर पिंडदान, हवन और विशेष पूजा-अर्चना की। पंडितों के मंत्रोच्चारण से वातावरण आध्यात्मिक और पवित्र हो उठा।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ-साथ ब्राह्मणों को दान देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। भक्तों का मानना है कि भादो अमावस्या पर किया गया पितृ तर्पण और हवन मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
नारायणी शिला का विशेष महत्व
पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि विश्व में केवल तीन स्थानों पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा की जाती है:
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गया जी (बिहार) – भगवान नारायण के चरण।
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हरिद्वार (उत्तराखंड) – भगवान नारायण की नाभि।
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बद्रीनाथ धाम (उत्तराखंड) – भगवान नारायण का कपाल।
इन तीनों स्थानों पर की गई पूजा से पितृ तृप्त होते हैं और उनकी आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है।
भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम
श्रद्धालुओं ने नारायणी शिला पर दुग्धाभिषेक कर अपने पितरों की शांति और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना की। हर की पौड़ी का पूरा क्षेत्र गंगा आरती, भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारण से गूंज उठा।