देहरादून ,
सहस्त्रधारा रोड स्थित पॉश एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद पर आखिरकार नगर निगम ने निर्णायक कार्रवाई की। करोड़ों की कीमत वाली निगम की जमीन को आज बिल्डर के कब्जे से मुक्त करा लिया गया। दो घंटे तक चली इस कार्रवाई में निगम की टीम, पुलिस बल और स्थानीय निवासी मौजूद रहे।
🔹 तीन हफ्ते पहले निगम को झेलनी पड़ी थी हार
कुछ सप्ताह पहले जब निगम की टीम सर्वे के लिए पहुंची थी, तब बिल्डर ने शासन के एक सचिव का नाम लेकर टीम को धमकाया और खाली हाथ लौटा दिया था। उस समय बिल्डर का साफ कहना था —
“अब कौन सी जांच? फाइल तो सचिव के पास है।”
🔹 बिल्डर की बड़ी चाल
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गलत तथ्य और नक्शों के आधार पर बिल्डर ने इमारतों के मानचित्र पास कराए।
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धीरे-धीरे निगम की 3800 वर्गमीटर जमीन में से लगभग 1250 वर्गमीटर पर कब्जा कर लिया।
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2023-24 में यह खेल तब खुला, जब बिल्डर ने भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया।
🔹 महंगी जमीन पर कब्जा, बंजर भूमि बदले में
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एटीएस कॉलोनी की जमीन की कीमत ₹75,000 प्रति वर्गगज है।
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बदले में बिल्डर जो जमीन देने की बात कर रहा था, वह ढालू और बंजर है, जिसकी दर केवल ₹26,000–₹45,000 प्रति वर्गगज है।
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इसके बावजूद तहसील सदर और निगम स्तर पर चूक हुई और प्रस्ताव शासन तक भेज दिया गया।
🔹 गोल्डन फॉरेस्ट कनेक्शन
यह भूमि गोल्डन फॉरेस्ट की संपत्तियों में भी दर्ज है, जिनका मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में निजी बिल्डर को हस्तांतरण की कोशिश ने सवाल और गहरे कर दिए हैं।
🔹 स्थानीय निवासियों की जीत
आज की कार्रवाई में जेसीबी मशीनों से कब्जा हटाया गया, झाड़ियां साफ हुईं और निगम की जमीन पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया गया।
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स्थानीय लोगों ने निगम की कार्रवाई का स्वागत किया।
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उम्मीद जताई कि अब यहां पार्क का निर्माण होगा और कॉलोनी का हरित क्षेत्र बढ़ेगा।
🔹 निगम का संदेश
नगर निगम अधिकारियों ने साफ कहा कि—
👉 “सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किसी हाल में बर्दाश्त नहीं होगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों पर ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।”