त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: मतगणना की पूरी तैयारी, 31 जुलाई को सुबह 8 बजे से शुरू होगी प्रक्रिया

15,024 कार्मिक मतगणना कार्य में होंगे तैनात, 8,926 जवान संभालेंगे सुरक्षा
राज्य निर्वाचन आयोग ने दी निष्पक्ष व पारदर्शी मतगणना की गारंटी

देहरादून, 30 जुलाई
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बाद अब मतगणना की घड़ी आ चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि 31 जुलाई को सुबह आठ बजे से सभी 12 जिलों के 89 विकासखंडों में मतगणना कार्य शुरू होगा। इसके लिए 15,024 कार्मिकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि 8,926 सुरक्षा जवानों की तैनाती से मतगणना स्थलों की सुरक्षा चाक-चौबंद की गई है।

प्रमुख आंकड़े:

  • 10,915 पदों के लिए मतगणना

  • 34,151 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला

  • 2 चरणों में हुआ मतदान: 24 और 28 जुलाई

  • मतदान प्रतिशत: 69.16% (महिला: 74.42%, पुरुष: 64.23%)

मतगणना की पारदर्शिता पर विशेष जोर
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने कहा कि जिस प्रकार शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान संपन्न हुआ, ठीक उसी तरह मतगणना भी पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से कराई जाएगी। मतगणना की निगरानी प्रेक्षकों, जोनल मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की देखरेख में होगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
मतगणना स्थलों पर बैरिकेडिंग, प्रवेश नियंत्रण और स्ट्रांग रूम की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। प्रत्येक केंद्र पर पुलिस क्षेत्राधिकारी, प्रभारी निरीक्षक या थानाध्यक्ष की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।

रिजल्ट होंगे ऑनलाइन उपलब्ध
जैसे ही रिटर्निंग अधिकारी चुनाव परिणाम घोषित करेंगे, आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी परिणाम प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि आम जनता आसानी से जानकारी प्राप्त कर सके।


❗ विजयी जुलूसों पर प्रतिबंध

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव परिणाम के बाद किसी भी प्रकार के जुलूस की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है।

निर्देशों की मुख्य बातें:

  • जुलूसों पर पूर्ण प्रतिबंध

  • वरिष्ठ अधिकारी को जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात करना अनिवार्य

  • मतगणना केंद्रों पर अनुभवी पुलिस अफसरों की ड्यूटी अनिवार्य


निष्कर्ष:
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की मतगणना को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पूरी तरह तैयार है। अब सभी की निगाहें 31 जुलाई की सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली मतगणना और उसके परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य की ग्रामीण राजनीतिक संरचना को तय करेंगे।

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