डीएम सविन बंसल के निर्देश पर जिला प्रशासन ने पकड़ी बड़ी अनियमितताओं की चेन, अधीक्षण अभियंता का वाहन जब्त
देहरादून ,
टिहरी बांध विस्थापितों को आवंटित की गई जमीनों में बड़े पैमाने पर घोटाला सामने आया है। डीएम सविन बंसल को जनता दर्शन के दौरान लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। भू-आवंटन में दोहरी प्रविष्टियों, कब्जे, और फर्जी आवंटन जैसे मामलों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब इस पूरे मामले की सीबीसीआईडी और विजिलेंस जांच की सिफारिश कर दी गई है।
🚨 प्रमुख घोटाले और विवादित भू-आवंटन केस:
🔹 मामला 1 – पुलमा देवी बनाम राजरानी:
एक ही जमीन (खसरा नं 399च) दो लोगों को आवंटित। राजरानी ने कब्जा किया, जबकि पुलमा देवी पहले खरीदार थीं।
👉 प्रशासन को एक आवंटन निरस्त करना पड़ा।
🔹 मामला 2 – सुमेर चन्द, हेमन्त और शैलेन्द्र:
ग्राम अटकफार्म के भूखंडों 28 और 29 पर कुन्दन लाल जोशी का अवैध कब्जा मिला।
👉 वास्तविक आवंटियों को आज तक कब्जा नहीं मिला।
🔹 मामला 3 – इरशाद अहमद बनाम फतरू:
बी-205 नंबर भूखंड वर्ष 2001 में इरशाद को आवंटित, लेकिन 2005 में वही भूखंड फतरू को भी दे दिया गया।
👉 बाद में प्रशासन ने फतरू का आवंटन निरस्त किया।
⚖️ प्रशासन की कार्रवाई और सख्त संदेश:
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अधीक्षण अभियंता (पुनर्वास) का वाहन ज़ब्त
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भूमिधरी प्रक्रिया में दोहरी प्रविष्टियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय
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पुराने सभी विवादित प्रकरणों की पुनरावलोकन और गहन जांच के लिए विशेष जांच दल की सिफारिश
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फ्रॉड में संलिप्त किसी को बख्शा नहीं जाएगा – जिला प्रशासन का स्पष्ट संकेत
🗣️ डीएम सविन बंसल का बयान:
“हमारा मकसद केवल जांच कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर पीड़ित विस्थापित को उसका हक मिले। घोटाले में संलिप्त किसी भी अफसर या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। यह एक संगठित भूमि घोटाला है जिसे जड़ से खत्म किया जाएगा।”
📌 घोटाले की विशेषताएं:
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वर्षों से जारी लैण्ड फ्रॉड, जिसमें उच्चाधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
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विस्थापितों के साथ दोहरी मार – पुनर्वास के नाम पर धोखा
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फर्जी दस्तावेजों और दोहरे आवंटन के जरिए लाभ कमाने का आरोप
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प्रशासन की अनदेखी से कई पीड़ितों को आज तक स्वामित्व या कब्जा नहीं मिला
🔍 आगे की राह:
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सीबीसीआईडी और विजिलेंस जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होंगी
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दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई तय
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भू-आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटली ट्रैक योग्य बनाने की योजना
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भविष्य में पुनर्वास परियोजनाओं की सख्त निगरानी और लेखा परीक्षण होगा
✍️ निष्कर्ष:
टिहरी बांध विस्थापन जैसी संवेदनशील पुनर्वास परियोजना में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार न सिर्फ पीड़ितों के अधिकारों का हनन है, बल्कि सरकारी मशीनरी की कार्यशैली पर गहरा प्रश्नचिह्न है। जिलाधिकारी की त्वरित और कड़ी कार्रवाई से जहां पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी है, वहीं प्रशासनिक पारदर्शिता की एक नई मिसाल भी कायम हुई है।