देहरादून,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समावेशी सेवा नीति और जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर देहरादून में दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिला अस्पताल परिसर में जल्द ही दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (DDRC) की स्थापना होने जा रही है, जिससे दिव्यांग नागरिकों को अब प्रमाण पत्र, फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, कृत्रिम अंग और उपकरण वितरण जैसी एकीकृत सेवाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी।
🏥 एकीकृत सेवाओं की सुविधा
पूर्व में ये सेवाएं विभिन्न स्थानों पर बिखरी थीं—हरबर्टपुर और राजा रोड स्थित उप-केंद्रों पर। इससे दिव्यांगजनों को भारी असुविधा होती थी। अब यह नया केंद्र जिला अस्पताल परिसर में स्थापित होगा, जिससे सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।
👉 सेवाओं में शामिल होंगी:
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दिव्यांगता प्रमाण पत्र
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कृत्रिम अंग और उपकरण वितरण (व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, श्रवण यंत्र)
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फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी
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मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्श
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विशेष शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण
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कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ने की पहल
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सरकारी योजनाओं से समन्वय (UDID कार्ड, छात्रवृत्ति, पेंशन इत्यादि)
🔧 केंद्र की तैयारी और स्थान निर्धारण
25 जून 2025 को आयोजित जिला प्रभारी समिति की बैठक में इस केंद्र की स्थापना का निर्णय लिया गया।
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गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय परिसर में एक हॉल और एक कक्ष को उपयुक्त पाया गया है।
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प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनु जैन, समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित अधिकारियों की संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया।
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साफ-सफाई, विद्युत संयोजन, आवश्यक मरम्मत एवं फर्नीचर की व्यवस्था का कार्य युद्धस्तर पर शुरू।
🧑⚕️ बहु-विषयी विशेषज्ञों की टीम
केंद्र में फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट, काउंसलर और अन्य विशेषज्ञों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम कार्यरत रहेगी।
👉 संचालन हेतु 14 स्वीकृत पद हैं, जिनका वेतन समाज कल्याण विभाग वहन करेगा। केंद्र का संचालन भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा किया जाएगा।
💬 प्रशासन की प्रतिबद्धता
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा:
“शासन की मंशा है कि दिव्यांगजनों को पुनर्वास से जुड़ी सभी सुविधाएं एक स्थान पर सुलभ हों। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्य शीघ्र पूर्ण कर केंद्र का संचालन प्रारंभ किया जाए। यह पहल समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है।”
🔍 डीडीआरसी का उद्देश्य
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दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना
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स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
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शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना
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सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण का निर्माण
देहरादून में प्रस्तावित यह डीडीआरसी केंद्र, न केवल सेवाओं के केंद्रीकरण का उदाहरण है, बल्कि एक समावेशी, संवेदनशील और सुगम व्यवस्था की नींव भी है। यह प्रयास उत्तराखंड को दिव्यांगजन हितैषी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।