उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं का विस्तार: अब गौचर और चिन्यालीसौड़ में उतर सकेंगे छोटे एरोप्लेन

देहरादून ,

उत्तराखंड सरकार प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हवाई सेवाओं को सुलभ और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम उठा रही है। अब गौचर (चमोली) और चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी छोटे एरोप्लेन की लैंडिंग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जहां फिलहाल सिर्फ हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित हो रही हैं।

एविएशन नेटवर्क को मिल रहा विस्तार

राज्य के नागरिक उड्डयन विभाग ने विमान संचालक और निर्माता कंपनियों से छोटे विमानों की उपलब्धता और संचालन क्षमता को लेकर बातचीत शुरू कर दी है। विभाग की ओर से इन कंपनियों को पत्राचार भी भेजा जा चुका है। सचिव नागरिक उड्डयन सचिन कुर्वे ने जानकारी दी कि यह मुद्दा हाल ही में मिनिस्टर कॉन्फ्रेंस ऑन सिविल एविएशन में उठाया गया था और अब इस दिशा में ठोस पहल की जा रही है।

कम समय और कम लागत, बढ़ रही लोकप्रियता

प्रदेश में वर्तमान में 12 स्थानों से हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित हो रही हैं, जो कि केंद्र व राज्य सरकार की उड़ान योजना के तहत आती हैं। इन सेवाओं की लोकप्रियता का बड़ा कारण इनका तेज़ और किफायती होना है, जिससे आम लोग और पर्यटक दोनों आकर्षित हो रहे हैं।

कहाँ-कहाँ हो रही हैं सेवाएं:

  • देहरादून से: नैनीताल, बागेश्वर, मसूरी, जोशियाड़ा, गौचर, अल्मोड़ा

  • हल्द्वानी से: बागेश्वर, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, चंपावत

  • पिथौरागढ़ से: अल्मोड़ा

  • इसके अतिरिक्त देहरादून–नैनी सैनी (पिथौरागढ़), पंतनगर–नैनी सैनी और दिल्ली–हरिद्वार के बीच भी हवाई सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

चारधाम यात्रा में भी लाभ

हर साल केदारनाथ, बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब जैसे धार्मिक स्थलों के लिए हेली सेवाएं चारधाम यात्रा के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। इससे श्रद्धालुओं की यात्रा सरल और सुगम हो रही है।

गौचर और चिन्यालीसौड़: तैयार हेलीपोर्ट, मौजूद एयरस्ट्रिप

इन दोनों स्थलों पर पहले से बने हेलीपोर्ट और मौजूद एयरस्ट्रिप को देखते हुए यहां छोटे विमानों की लैंडिंग की संभावनाएं प्रबल हैं। विभाग इस बात का आकलन कर रहा है कि क्या मौजूदा बुनियादी ढांचे में वाणिज्यिक विमानों की नियमित सेवाएं संभव हैं।


निष्कर्ष:
उत्तराखंड में हवाई सेवाओं का यह विस्तार न सिर्फ आवागमन को सुविधाजनक बनाएगा बल्कि पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी एक बड़ा कदम साबित होगा। यदि योजना सफल रहती है तो जल्द ही प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में छोटे विमान भी नियमित रूप से उड़ान भरते नजर आ सकते हैं।

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