देहरादून, 13 जुलाई:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बल्लीवाला, देहरादून में आयोजित एक सम्मान समारोह में प्रतिभाग किया, जिसे धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा “भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड” के लिए किए जा रहे प्रयासों को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड की शपथ भी दिलाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान समारोह केवल एक व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता के सपनों और विश्वास का उत्सव है। उन्होंने कहा कि राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का संकल्प अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें जनता का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए तकनीक आधारित पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली की निगरानी, सीएम हेल्पलाइन 1905 और भ्रष्टाचार के खिलाफ 1064 हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
पिछले तीन वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार और योजनाओं में कमीशनखोरी जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। अब तक 200 से अधिक लोगों को जेल भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बीते चार वर्षों में राज्य में 24,000 से अधिक सरकारी नौकरियाँ दी गई हैं।
उन्होंने राज्य में लागू की गई नीतियों का उल्लेख करते हुए समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून, लैंड और लव जिहाद पर कार्रवाई, धर्मांतरण और दंगारोधी कानूनों को राज्य की शासन व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत राज्य में छद्म पहचान वाले तत्वों की पहचान और गिरफ्तारी की जा रही है, जिसमें अभी तक 200 से अधिक संदिग्धों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा” मंत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी शासन व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी दोहराया कि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में सतत प्रयास जारी रहेंगे।