समाजसेवी लालचंद शर्मा, दिगंबर भरत गिरी समेत श्रद्धालुओं ने की गुरुओं की वंदना, सनातन परंपरा और मातृशक्ति को बताया गुरु का प्रथम स्वरूप
देहरादून, 10 जुलाई।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर टपकेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून में श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिला। इस अवसर पर ब्रह्मलीन माया गिरी महाराज की समाधि स्थल पर पूजन और ध्वजारोहण कर गुरु परंपरा को नमन किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष लालचंद शर्मा, दिगंबर भरत गिरी, अनेक संत, विद्वान और भक्तजन उपस्थित रहे।
🙏 गुरु की महिमा पर हुए सारगर्भित विचार:
दिगंबर भरत गिरी ने कहा:
“गुरु पूर्णिमा सनातन धर्म की आत्मा है। यह केवल पर्व नहीं, बल्कि वह दिन है जब हम अज्ञान से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। गुरु की कृपा से ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव है।”
उन्होंने भगवान शिव को आदिगुरु बताते हुए कहा कि दक्षिणामूर्ति रूप में उन्होंने समस्त ऋषियों को ज्ञान प्रदान किया, और उसी स्मरण में यह परंपरा आज भी जीवित है।
👩👧 माँ को बताया प्रथम गुरु:
लालचंद शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा:
“जब एक शिशु जन्म लेता है, तो सबसे पहला शब्द ‘माँ’ होता है। माँ न केवल जीवन देती है, बल्कि संस्कार, प्रेरणा और आत्मबल का संचार भी करती है। इसीलिए माँ को भी प्रथम गुरु कहा गया है।”
उन्होंने कहा कि यह पर्व हिंदू, बौद्ध और जैन परंपरा में गुरुजनों को सम्मान देने, उनके प्रति आभार प्रकट करने का दिवस है। यह आषाढ़ पूर्णिमा को मनाया जाता है और आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गुरुओं को समर्पित होता है।
📿 उपस्थित श्रद्धालुओं और आयोजकों ने की गुरु वंदना:
इस अवसर पर
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दिगंबर भरत गिरी,
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अजीत गिरी महाराज,
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डी.के. शर्मा,
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पंडित कमल भट्ट,
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पंडित घनश्याम शास्त्री,
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और अनेक श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
सभी ने गुरु पूर्णिमा की बधाइयां और शुभकामनाएं दीं और गुरु परंपरा को जीवन का आधार बताया।
विशेष टिप्पणी:
गुरु पूर्णिमा जैसे पर्व हमारे जीवन को अध्यात्म, श्रद्धा और मार्गदर्शन से जोड़ते हैं। टपकेश्वर मंदिर में यह आयोजन उत्तराखंड की गुरु परंपरा और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है।
