ऋषिकेश/टिहरी,
टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना के तहत भूमि फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें वर्षों से व्यथित और विस्थापित पुलमा देवी को पुनः भूमिधरी से वंचित कर दिया गया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की सख्त निगरानी और जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है।
📌 क्या है मामला?
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पुलमा देवी की भूमि वर्ष 2007 में विक्रय हो चुकी थी।
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2019 में पुनर्वास विभाग ने बिना किसी वैधानिक जांच के, उसी भूमि को दोबारा उसी व्यक्ति के नाम चढ़ा दिया जिसने पहले ही उसे बेच दिया था।
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यह सारा प्रकरण अवस्थापना पुनर्वास खंड, ऋषिकेश की मिलीभगत से हुआ, जो अब कठघरे में है।
🧾 मामला उठा था जनता दर्शन में
यह गंभीर मामला जून महीने के द्वितीय ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम के दौरान सामने आया था, जहां पुलमा देवी ने डीएम के समक्ष न्याय की गुहार लगाई थी। डीएम ने मामले को व्यक्तिगत संज्ञान में लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए थे।
⚖️ डीएम का कड़ा रुख:
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“जब तक पुलमा देवी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक प्रशासन पीछे नहीं हटेगा,” — डीएम मयूर दीक्षित
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मामले की जांच के बाद एसडीएम अपूर्वा को क्रिमिनल प्रोसेडिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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पुनर्वास खंड के अधीक्षण अभियंता का वाहन जब्द कर लिया गया है और सम्पूर्ण दस्तावेजों सहित पेश होने के निर्देश जारी किए गए हैं।
⚠️ SIT जांच की चेतावनी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि यदि विभागीय सहयोग में ढिलाई पाई गई या तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई, तो एसआईटी जांच की संस्तुति की जाएगी।
🗣️ निष्कर्ष में जिलाधिकारी ने कहा:
“यह सिर्फ ज़मीन का मामला नहीं, बल्कि एक विस्थापित महिला के हक़ और सम्मान की लड़ाई है। कोई भी अधिकारी हो, अगर दोषी पाया गया, तो सख्त कार्रवाई तय है।”