देहरादून की धड़कन ‘घंटाघर’ बना दिव्य और भव्य, डीएम सविन बंसल की मॉनिटरिंग लाई रंग – uttarakhandawaaz.in

देहरादून की धड़कन ‘घंटाघर’ बना दिव्य और भव्य, डीएम सविन बंसल की मॉनिटरिंग लाई रंग

शहर को संवारने की दिशा में जिला प्रशासन की नई कार्यशैली, जनता में बढ़ा विश्वास

देहरादून,

राजधानी देहरादून का ऐतिहासिक घंटाघर, जो अब तक केवल एक प्रतीक था, अब शहर की शान और पहचान बनकर सामने आ रहा है। जिला अधिकारी सविन बंसल की सतत निगरानी और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते घंटाघर को आधुनिकता और पारंपरिकता के संगम से सुसज्जित दिव्य-भव्य स्वरूप में तैयार किया गया है।


🕰️ घंटाघर का नया स्वरूप – सौंदर्य और सुविधा का संगम

देहरादून का घंटाघर न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि शहर के दिल की तरह कार्य करता है। अब इसे नया जीवन मिला है:

  • पारंपरिक गढ़वाली-जयपुरी वास्तुकला की झलक

  • आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट के हिसाब से विकसित चौराहा

  • लोक संस्कृति को समर्पित डिजाइन, जो पर्यटकों और नागरिकों दोनों को आकर्षित करता है

  • स्मार्ट लाइटिंग, बैठने की व्यवस्था, हरियाली और साफ-सुथरा वातावरण


👷‍♂️ डीएम सविन बंसल की ‘एक्शन प्लान’ कार्यशैली

जिलाधिकारी सविन बंसल के ज्वॉइनिंग के दूसरे ही महीने में इस परियोजना का डिज़ाइन, सर्वे और कांसेप्ट तैयार कर लिया गया था। फिर:

  • स्मार्ट सिटी मिशन से बजट का प्रबंधन

  • नियमित फील्ड विज़िट और टीम के साथ ग्राउंड रिव्यू

  • पारदर्शिता और कार्य की गति पर विशेष फोकस

बंसल की शैली “बजट लाओ, प्लान भरो, और तुरंत काम शुरू करो” के सिद्धांत पर आधारित रही।


🏙️ शहर के अन्य चौकों का भी सौंदर्यीकरण

घंटाघर के साथ-साथ परेड ग्राउंड, बल्लूपुर चौक, दर्शनलाल चौक जैसे अन्य प्रमुख स्थलों पर भी पारंपरिक शैली में सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। इन स्थलों को पर्यटन व लोक विरासत के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


🛣️ यातायात भी होगा सुगम, बढ़ेगी स्मार्ट सिटी की रैंकिंग

घंटाघर के पुनरुद्धार से जहां यातायात सुचारु होगा, वहीं शहर की स्मार्ट सिटी रैंकिंग और सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में भी सुधार होने की संभावना है। ट्रैफिक कंट्रोल के साथ पैदल यात्रियों की सुविधा को भी प्राथमिकता दी गई है।


🔍 जनता के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता

वर्तमान जिला प्रशासन की कार्यशैली में आई जवाबदेही, तत्परता और पारदर्शिता ने जनता के बीच विश्वास की नई नींव रखी है। घंटाघर का कायाकल्प इसी बदलाव का प्रमाण है:

“जनहित के निर्णय अब केवल फाइलों में नहीं, धरातल पर नज़र आ रहे हैं”

घंटाघर अब सिर्फ एक घंटा बजाने वाला ढांचा नहीं, बल्कि देहरादून की सांस्कृतिक और प्रशासनिक नब्ज बन चुका है। जिलाधिकारी सविन बंसल की कार्यशैली यह संदेश देती है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो हर योजना सिर्फ सपना नहीं, ज़मीनी सच्चाई बन सकती है।

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