देहरादून-मसूरी रोपवे: सफर अब सिर्फ 20 मिनट का, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

देहरादून,

 उत्तराखंड के पर्यटकों और मसूरी जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। देहरादून और मसूरी के बीच देश का सबसे लंबा पैसेंजर रोपवे बनकर तैयार हो रहा है, जो दोनों शहरों के बीच की 33 किलोमीटर की दूरी को मात्र 15 से 20 मिनट में तय करेगा। अक्सर जाम और उबड़-खाबड़ सड़कों से जूझने वाले पर्यटकों को अब सीधी, सुरक्षित और मनोरम यात्रा का अनुभव मिलेगा।


प्रमुख तथ्य और आंकड़े:

🚡 परियोजना की विशेषताएं

  • लंबाई: 5.2 किलोमीटर (देश का सबसे लंबा पैसेंजर रोपवे)

  • समय: केवल 15-20 मिनट में देहरादून से मसूरी

  • ऊंचाई: लगभग 1,000 मीटर तक

  • क्षमता: प्रति घंटे 1,300 यात्रियों को ढोने की क्षमता

  • प्रौद्योगिकी: मोनो-केबल डिटैचेबल गोंडोला सिस्टम

  • ऊर्जा स्रोत: पूरी तरह बिजली से संचालित – शून्य कार्बन उत्सर्जन

🔧 निर्माण की स्थिति (जून 2025 तक)

  • कुल 26 टावरों में से 16 का निर्माण पूर्ण

  • 10 मंजिला पार्किंग कॉम्प्लेक्स का 50% कार्य पुरकुल में पूर्ण

  • परियोजना प्रगति: लगभग 50% निर्माण कार्य संपन्न

  • निर्माण एजेंसी: मसूरी स्काई कार प्राइवेट लिमिटेड
    (FIL इंडस्ट्रीज, फ्रांस की POMA SAS और SRM इंजीनियरिंग का कंसोर्टियम)

💸 परियोजना लागत

  • कुल लागत: ₹285 करोड़

  • पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर निर्माण


🌄 पर्यटन और पर्यावरण के लिए लाभ

  • पर्यटन को बढ़ावा: पर्यटकों को मसूरी पहुंचने का एक नया और आकर्षक विकल्प

  • यातायात से राहत: मसूरी रोड पर ट्रैफिक जाम में भारी कमी

  • पर्यावरण हितैषी पहल: ग्रीन ट्रैवल के लिए प्रोत्साहन, प्रदूषण में कटौती


🅿️ सुविधाएं और संरचना

  • पुरकुल टर्मिनल पर 10 मंजिला बहुस्तरीय पार्किंग: 2,000+ वाहनों की क्षमता

  • लाइब्रेरी चौक पर टर्मिनल: मसूरी के हृदय स्थल तक सीधा पहुंच


🌍 दुनिया में पहचान

  • यह रोपवे दक्षिण एशिया का सबसे लंबा पैसेंजर रोपवे होगा

  • विश्व के टॉप-5 मोनो-केबल रोपवे में शामिल होने की संभावना


पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल का बयान:

“यह परियोजना उत्तराखंड पर्यटन का भविष्य बदल देगी। रोपवे यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी एक मील का पत्थर साबित होगा।”


निष्कर्ष:

सितंबर 2026 तक प्रस्तावित इस परियोजना के पूर्ण होने पर देहरादून से मसूरी की यात्रा न केवल तेज, बल्कि रोमांचकारी और पर्यावरण-संवेदनशील भी होगी। यह उत्तराखंड को आधुनिक तकनीक और हरित पर्यटन की दिशा में अग्रणी बनाएगा।

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