देहरादून,
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उद्घाटन किया। उन्होंने योग को भारत की चेतना, विरासत और सॉफ्ट पावर का सशक्त प्रतीक बताया। राष्ट्रपति ने कहा, “Prevention is better than cure (इलाज से बेहतर रोकथाम है), और योग इसी भावना को साकार करता है।”
उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को व्यक्ति से, समाज को समाज से, और राष्ट्रों को जोड़ने का कार्य करता है। योग आज वैश्विक स्तर पर लाखों लोगों को लाभ पहुंचा रहा है और इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है।
राष्ट्रपति का संदेश:
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योग न केवल शरीर को स्वस्थ करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलन देता है।
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स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और अंततः स्वस्थ राष्ट्र की नींव रखता है।
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सभी संस्थाओं से आह्वान किया कि योग को जनसुलभ और समावेशी बनाया जाए।
राज्यपाल का वक्तव्य:
उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल (से. नि.) गुरमीत सिंह ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा,
“योग भारत की प्राचीनतम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसने संपूर्ण विश्व को जोड़ने का कार्य किया है।”
उन्होंने कहा कि योग सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि आत्मअनुशासन और मानसिक शांति का मार्ग है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना की, जिससे योग एक वैश्विक आंदोलन बना है।
इस वर्ष योग दिवस की थीम – “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य”, भारत की सनातन सोच “वसुधैव कुटुम्बकम्” की वैश्विक अभिव्यक्ति है।
योग नीति 2025 की झलक:
राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से तैयार की गई भारत की पहली राज्य स्तरीय योग नीति – उत्तराखंड योग नीति 2025 की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस नीति के प्रमुख बिंदु:
🔹 योग उद्यमिता और अनुसंधान को बढ़ावा
🔹 योग और ध्यान केंद्रों हेतु 20 लाख रु. तक पूंजीगत अनुदान
🔹 अनुसंधान के लिए 10 लाख रु. तक शोध अनुदान
🔹 योग सर्टिफिकेशन बोर्ड से प्रमाणन को प्राथमिकता
🔹 योग निदेशालय की स्थापना
लक्ष्य:
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2030 तक पांच नए योग हब की स्थापना
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मार्च 2026 तक सभी आयुष हेल्थ वेलनेस केंद्रों में योग सेवाएं
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समुदाय-आधारित माइंडफुलनेस कार्यक्रम
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योग संस्थानों का 100% पंजीकरण
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ऑनलाइन योग प्लेटफार्म का निर्माण
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15-20 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का लक्ष्य (मार्च 2028 तक)
मंत्री ने आशा जताई कि यह नीति पारंपरिक योग ज्ञान, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक अवसरों से जोड़ने में सफल सिद्ध होगी।
योग दिवस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, स्कूली बच्चों, जवानों और अधिकारियों ने भाग लिया। दून की वादियों में प्राचीन योग परंपरा की यह गूंज देश और दुनिया के लिए प्रेरणा बनी।