राष्ट्रपति तपोवन व निकेतन आम जनता के लिए जल्द खुलेंगे

देहरादून,

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देहरादून में राष्ट्रपति तपोवन और राष्ट्रपति निकेतन का उद्घाटन किया।
👉 तपोवन — 19 एकड़ क्षेत्र में फैला एक आध्यात्मिक विश्राम स्थल,
👉 निकेतन — 1838 से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत,
दोनों ही स्थान क्रमशः 24 जून और 1 जुलाई से आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।

राष्ट्रपति ने एम्फीथिएटर, आगंतुक केंद्र, कैफेटेरिया, स्मारिका दुकान, और राष्ट्रपति उद्यान की आधारशिला भी रखी, जो एक 132 एकड़ का नेट-जीरो पार्क होगा — दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह सुलभ।


🌿 जैव विविधता और संरक्षण पर बल

राष्ट्रपति तपोवन क्षेत्र में:

  • 117 वनस्पतियों की प्रजातियाँ

  • 52 तितलियाँ, 41 पक्षी प्रजातियाँ

  • 7 संरक्षित जंगली स्तनधारी

निकेतन की वास्तुकला, लिली तालाब, प्राचीन अस्तबल और बागों के साथ, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व का केंद्र है।

इस मौके पर एक जैव विविधता पुस्तक भी जारी की गई, जिसमें 300+ वनस्पतियों और 170+ जीवों की जानकारी दी गई है।


👩‍🦯 दिव्यांग सशक्तिकरण पर राष्ट्रपति का संवेदनशील संदेश

राष्ट्रपति ने देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान का भी दौरा किया।
उन्होंने मॉडल स्कूल, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, और सांस्कृतिक प्रदर्शनी में छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा:

“किसी देश की प्रगति इस बात से मापी जाती है कि वह समाज दिव्यांग व्यक्तियों के साथ कैसा व्यवहार करता है।”

उन्होंने सुगम्य भारत अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, और प्रौद्योगिकी के उपयोग से दिव्यांगों की भागीदारी को रेखांकित किया।

राष्ट्रपति भवन में दिव्यांगजनों के लिए उठाए गए प्रयासों में:

  • दिव्यांगों द्वारा संचालित कैफे

  • ‘पर्पल फेस्ट’ (अमृत उद्यान, मार्च 2025) शामिल हैं।


🌱 शिक्षा और तकनीक से आत्मनिर्भरता

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा:

“शिक्षा सशक्तिकरण का सबसे मजबूत साधन है। आप लगन, आत्मविश्वास और मेहनत से लक्ष्य प्राप्त करें – आप देश का गौरव बनें।”


📌 कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति:

  • राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (से.नि)

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

  • मुख्य सचिव व डीजीपी

  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा उत्तराखंड के लिए दिव्यांग सशक्तिकरण, पारिस्थितिकी संरक्षण, और समावेशी विकास की दिशा में एक प्रेरणास्पद कदम है। तपोवन और निकेतन जैसे स्थलों का आम जनता के लिए खुलना राज्य को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की दिशा में नई पहचान देगा।

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