देहरादून ,
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून के मद्देनजर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक कर भारी-भरकम निर्देशों की झड़ी लगा दी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस बार किसी भी आपदा की स्थिति में लापरवाही नहीं चलेगी।
⛏️ भूस्खलन पर सख्त तैयारी: 15 मिनट में JCB अनिवार्य
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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी भूस्खलन की आपात स्थिति में 15 मिनट के भीतर JCB मौके पर पहुंचना अनिवार्य किया जाए।
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लैंडस्लाइड मैपिंग कर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और डेटाबेस तैयार करने के आदेश दिए।
🏥 हेलीकॉप्टर और मेडिकल आपातकाल की तैयारी
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पिथौरागढ़ में एक अतिरिक्त हेलीकॉप्टर की स्थायी तैनाती के निर्देश।
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पिथौरागढ़ एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज के कार्यों में तेजी लाने को कहा।
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गर्भवती महिलाओं का डेटा तैयार करने और अगले 4 माह में डिलीवरी वाली महिलाओं के लिए पहले से प्रबंध के निर्देश।
🏫 विद्यालयों की सुरक्षा प्राथमिकता में
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मानसून के दौरान जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित कर बंद किया जाए।
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छात्रों के लिए वैकल्पिक शेल्टर व्यवस्था की जाए।
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स्कूलों, अस्पतालों और आश्रमों की तीन दिन में सुरक्षा जांच पूरी करने के निर्देश।
🚨 रियल टाइम अपडेट और सामुदायिक भागीदारी
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बंद सड़कों की रियल टाइम जानकारी पोर्टल और एप पर अपडेट की जाए।
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सभी जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टुकड़ियों की तैनाती हो।
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स्थानीय युवाओं को आपदा राहत कार्यों के लिए प्रशिक्षण देने की बात कही।
🌊 बाढ़ और जलाशय प्रबंधन
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हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों में बाढ़ प्रबंधन के स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से सर्वेक्षण कराने के निर्देश।
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जलाशयों की सिल्ट सफाई और क्षमता बनाए रखने के निर्देश।
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गोला अप्रोच रोड और कैंची बाईपास जैसे प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने की बात कही।
📢 जनजागरूकता अभियान और टोल फ्री नंबरों का प्रचार
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सचेत एप, आपदा हेल्पलाइन और टोल फ्री नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।
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बाढ़ चौकियों की पर्याप्त स्थापना और खुले बिजली तारों को कवर करने जैसे निर्देश भी दिए गए।
🛤️ चारधाम यात्रा और ट्रैफिक प्रबंधन
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अधिक बारिश की चेतावनी को देखते हुए यात्रियों को संवेदनशील स्थानों पर रोकने, और स्थिति सामान्य होने के बाद ही यात्रा पुनः आरंभ करने के निर्देश।
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पहाड़ी मार्गों का पैचवर्क और पुलों का ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा,
“प्राकृतिक आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन समय से की गई तैयारी और जनभागीदारी से इनके प्रभाव को कम किया जा सकता है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में यह हमारे उत्तरदायित्व का विषय है।”