देहरादून ,
उत्तराखंड में शहरी विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सेतु आयोग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नगर निकायों को सशक्त बनाने संबंधी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट नगर निगमों और स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कई अहम सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
📘 रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
🏛️ 1. वित्तीय स्वायत्तता और 18 कार्यों का हस्तांतरण
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रिपोर्ट में भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची में वर्णित 18 कार्यों (जैसे जल आपूर्ति, शहरी नियोजन, सफाई, सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि) को स्थानीय निकायों को सौंपने की सिफारिश की गई है।
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साथ ही, राजस्व संग्रहण की क्षमता को बढ़ाने, स्थायी आय स्रोत विकसित करने पर बल दिया गया है।
🧠 2. स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीकी नवाचार
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GIS मैपिंग, डिजिटल डैशबोर्ड, और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया जैसे स्मार्ट समाधानों को अपनाने का सुझाव दिया गया है।
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ई-गवर्नेंस को शहरी सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रमुख माध्यम माना गया है।
🧑🏫 3. मानव संसाधन विकास
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निकायों के कर्मचारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर।
🌆 4. अन्य राज्यों से प्रेरणा
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महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, और ओडिशा जैसे राज्यों में हुए शहरी सुधारों का अध्ययन कर उत्तराखंड की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उसे अपनाने की बात की गई है।
🌍 5. आपदा प्रबंधन में नागरिक भागीदारी
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रिपोर्ट में आपदा-रोधी योजनाओं (जैसे भूस्खलन प्रबंधन) के निर्माण में स्थानीय जनता की राय को प्राथमिकता देने की सिफारिश है।
🤝 रिपोर्ट सौंपने के मौके पर प्रमुख हस्तियां:
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कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत
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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन
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सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी
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सेतु आयोग सीईओ शत्रुघ्न सिंह
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शहरी विकास सचिव नितेश झा
साथ ही आयोग से डॉ. भावना सिंधे, डॉ. प्रिया भारद्वाज, अंकित कुमार और शहजाद अहमद मलिक उपस्थित रहे।
🗣️ मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया (संक्षिप्त):
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि, “उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों को भविष्य के लिए तैयार करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेतु आयोग की यह रिपोर्ट मार्गदर्शक सिद्ध होगी। सरकार सिफारिशों को नीति में शामिल करने की दिशा में गंभीरता से काम करेगी।”यह रिपोर्ट शहरी शासन के ढांचे में बुनियादी बदलाव का रोडमैप प्रदान करती है। यदि रिपोर्ट की सिफारिशों को नीति में स्थान मिलता है, तो उत्तराखंड के नगर निकाय प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक-समर्थ बन सकते हैं — जो राज्य के समावेशी और सतत विकास के लिए आवश्यक है।