हेमकुंट साहिब (चमोली) ,
सिख श्रद्धालुओं के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब के कपाट आज विधिवत रूप से ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयघोष के बीच सुबह खोले गए, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा की लहर दौड़ गई। गढ़वाल स्काउट्स और पंजाब से आए दो बैंडों की संगत में शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
📖 धार्मिक विधि-विधान से हुई शुरुआत
मुख्य ग्रंथी मिलाप सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अपने सिर पर धारण कर शीतकालीन निवास से लेकर मुख्य गुरुद्वारा परिसर तक पवित्र स्वरूप में ले जाया। यात्रा के दौरान सेना के जवानों ने अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
सुबह 10 बजे से धार्मिक अनुष्ठान सुखमनी साहिब पाठ से प्रारंभ हुए, जिसके पश्चात भाई मक्खन सिंह जी ने भावपूर्ण कीर्तन प्रस्तुत किया। दोपहर 12:30 बजे संगत द्वारा मानवता के कल्याण हेतु अरदास की गई।
🚩 पाँच हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी
लगभग 5000 से अधिक श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचे। चारों ओर 5 फीट बर्फ के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उनकी आस्था ने इस अवसर को और भी भावनात्मक और अद्वितीय बना दिया।
🔰 सुरक्षा और सुविधा का उत्कृष्ट प्रबंधन
- आईटीबीपी, एसडीआरएफ और पुलिस बल ने पूरे ट्रैक मार्ग पर सुरक्षा और सहायता प्रदान की।
- बर्फ से ढके ट्रैक पर श्रद्धालुओं को ग्लेशियर पार कराने में मदद दी गई।
- सेना के जवानों ने भारी बर्फ हटाकर दर्शन को संभव बनाया।
🏗️ क्षतिग्रस्त पुल का वैकल्पिक निर्माण
मार्च 2025 में हुए भूस्खलन में क्षतिग्रस्त गोविंदघाट का पुल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वैली ब्रिज के रूप में अल्प समय में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे यात्रा बाधित नहीं हुई।
हेमकुंट ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने मुख्यमंत्री धामी व सेना को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा:
“उनके अथक प्रयासों से ही श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन की सुविधा मिल पाई है।”
🎖️ विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
इस अवसर पर ब्रिगेड कमांडर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को हेमकुंट ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया। गोविंदघाट के महाप्रबंधक सेवा सिंह और हेमकुंट साहिब के प्रबंधक गुरनाम सिंह भी मौजूद रहे। बर्फ की चादर में ढके पवित्र धाम में आज श्रद्धा, सेवा और सुरक्षा का संगम देखा गया। हर बार की तरह इस बार भी श्री हेमकुंट साहिब की यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुभव, बल्कि संघर्ष, सहयोग और आस्था की मिसाल बनकर उभरी है।
वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह!