देहरादून,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सीएम हेल्पलाइन 1905 की प्रभावशीलता और शिकायत निस्तारण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद किया। यह संवाद मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान हुआ, जिसमें कई विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी रही।
मुख्यमंत्री ने पहले की बैठक में विभिन्न विभागों को निर्देशित किया था कि शिकायतों का तय समय सीमा में निस्तारण किया जाए। इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य यह जानना था कि इन निर्देशों का कितना असर हुआ है।
✅ शिकायतकर्ताओं ने जताया संतोष
मुख्यमंत्री से बातचीत में अधिकतर शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी समस्याएं अब हल हो चुकी हैं। कुछ प्रमुख मामलों में:
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लक्ष्मी देवी, उत्तरकाशी: शिक्षा विभाग से पारिवारिक पेंशन की शिकायत थी, जो अब स्वीकृत हो चुकी है।
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जगदम्बा प्रसाद नौटियाल, रुद्रप्रयाग: मेडिकल बिल भुगतान में देरी की शिकायत थी, जिसका अब निस्तारण हो गया है।
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बहादुर सिंह बिष्ट, नैनीताल: उद्यान विभाग से सेवानिवृत्त, जीपीएफ भुगतान में देरी थी, जो अब पूर्ण हो चुका है।
सभी ने मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत आभार जताया और उनके हस्तक्षेप को ही समाधान का कारण बताया।
🗣 मुख्यमंत्री की सक्रियता और संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री धामी ने यह स्पष्ट किया कि केवल निर्देश देना ही नहीं, बल्कि फॉलो-अप और मानवीय दृष्टिकोण से काम लेना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनशिकायतों के निस्तारण में कोताही नहीं होनी चाहिए।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, एडीजी ए.पी. अंशुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय और एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी मौजूद रहे।
सीएम हेल्पलाइन को लेकर सरकार की यह सक्रियता दर्शाती है कि उत्तराखंड प्रशासन शिकायतों की जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति गंभीर है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फीडबैक लेना एक मजबूत प्रशासनिक संदेश है — कि शिकायत सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं, समाधान तक पहुंचने का जरिया है।