समर्थ पोर्टल अब विश्वविद्यालयों के हवाले, शासन करेगा केवल मॉनिटरिंग: डॉ. धन सिंह रावत

राजकीय विश्वविद्यालयों को मिली स्वायत्तता, शैक्षणिक कैलेण्डर भी स्वयं तय करेंगे

देहरादून,

उत्तराखंड में अब समर्थ पोर्टल का संचालन राज्य सरकार के बजाय राजकीय विश्वविद्यालय स्वयं करेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सोमवार को यह घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब शासन की भूमिका केवल पोर्टल की मॉनिटरिंग तक सीमित रहेगी।

विधानसभा स्थित सभाकक्ष में हुई उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में डॉ. रावत ने कहा कि,

“अब विश्वविद्यालय खुद समर्थ पोर्टल का संचालन करेंगे ताकि प्रवेश से लेकर शिक्षण और प्रशासनिक गतिविधियां बेहतर ढंग से संचालित हो सकें।”

क्या है ‘समर्थ पोर्टल’?

यह पोर्टल प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश और शैक्षणिक संचालन के लिए बनाया गया डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

डॉ. रावत ने कहा कि विगत वर्षों में पोर्टल के संचालन में कई तकनीकी परेशानियां सामने आई थीं, जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

कैलेण्डर भी तय करेंगे विश्वविद्यालय

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय अब आपसी समन्वय से एक समान वार्षिक शैक्षणिक कैलेण्डर तैयार करेंगे। इससे पूरे प्रदेश में प्रवेश, परीक्षा और परिणाम एकसमान समय पर संपन्न हो सकेंगे।

“शैक्षणिक अनुशासन के लिए यह जरूरी है कि साल में कम से कम 180 शिक्षण दिवस सुनिश्चित किए जाएं और छात्रों की 75% उपस्थिति अनिवार्य हो।”
— डॉ. धन सिंह रावत

अन्य अहम निर्देश

  • प्राचार्यों के रिक्त पदों पर एक सप्ताह में डीपीसी कर नियुक्तियां

  • असिस्टेंट प्रोफेसरों के रिक्त पदों की विषयवार रिपोर्ट तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश

  • प्रवेश प्रक्रिया को लेकर प्रचार-प्रसार तेज करने के निर्देश

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

  • रणजीत सिन्हा (सचिव, उच्च शिक्षा)

  • प्रो. एन.के. जोशी (कुलपति, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय)

  • प्रो. सुरेखा डंगवाल (कुलपति, दून विश्वविद्यालय)

  • प्रो. के.डी. पुरोहित (रूसा सलाहकार)

  • प्रो. ए.एस. उनियाल, डॉ. दीपक पाण्डेय

  • वर्चुअली: प्रो. एस.एस. बिष्ट (एसएसजे विश्वविद्यालय), प्रो. कमल किशोर पाण्डे

यह निर्णय उत्तराखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक स्वायत्त, जवाबदेह और दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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