देहरादून,
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने मदरसों में दोहरी शिक्षा व्यवस्था को समाप्त करने के लिए बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य के मदरसों में तैतानिया, फोकानिया, पंजुम, मुन्शी, मौल्वी और मौल्लिम जैसी पारंपरिक धार्मिक डिग्रियां पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।
❝अब दो सिलेबस नहीं – सिर्फ उत्तराखंड बोर्ड चलेगा❞
शादाब शम्स ने दो टूक शब्दों में कहा:
“हमें ये सब डिग्रियां नहीं चाहिए भाई। हमें हमारे बच्चों को वही पढ़ाना है, जो उत्तराखंड बोर्ड में है। दो सिलेबस एक साथ नहीं चल सकते।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मदरसा बोर्ड की पढ़ाई जारी रही, तो उत्तराखंड बोर्ड की पढ़ाई को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकेगा। इसीलिए अब निर्णय अंतिम और अपरिवर्तनीय है – मदरसे अब केवल उत्तराखंड बोर्ड का सिलेबस पढ़ाएंगे।
🔒 बाहरी छात्रों के लिए प्रवेश बंद
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने दूसरा बड़ा निर्णय लेते हुए कहा:
“हमारे एडमिशन सिर्फ उत्तराखंड के बच्चों के लिए हैं। बाहरी बच्चों के लिए फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है।”
इस निर्णय का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो उत्तराखंड के बाहर से मदरसों में पढ़ने आते थे।
⚖️ “कॉन्ट्रोवर्सी नहीं, शिक्षा हमारी प्राथमिकता”
शम्स ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड किसी भी धार्मिक या राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ेगा:
“हम मदरसा बोर्ड से अलग लाइन ले चुके हैं। हमारा फोकस सिर्फ शिक्षा पर है – सही, मजबूत और भविष्य को संवारने वाली।”
🌱 शिक्षा का नया दौर शुरू
इस कदम को राज्य के मदरसों में एक नई और आधुनिक शिक्षा प्रणाली की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अब मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की ओर अग्रसर किया जाएगा।
🟢 मुख्य बिंदु संक्षेप में:
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❌ पारंपरिक धार्मिक डिग्रियों पर पूर्ण विराम
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✅ केवल उत्तराखंड बोर्ड का सिलेबस
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🚫 बाहरी राज्यों के छात्रों के लिए प्रवेश बंद
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🎯 फोकस: सशक्त, समान और आधुनिक शिक्षा
यह निर्णय उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक साहसिक और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
