कांग्रेस ने भाजपा सांसद कगना रनौत के बयान पर किया पलटवार – uttarakhandawaaz.in

कांग्रेस ने भाजपा सांसद कगना रनौत के बयान पर किया पलटवार

भाजपा सांसदों को किसानों में दुष्कर्मी और हत्यारे भी नजर आने लगे हैंः प्रतिमा सिंह
देहरादून ,

उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर प्रतिमा सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की बडबोली सांसद कंगना रनौत के बेशर्मी से दिये गये बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों को भाजपा नेताओं द्वारा पहले आतंकी बताया गया और अब उसी भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को किसानों में दुष्कर्मी और हत्यारे भी नजर आने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा का महिला विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में विगत कुछ समय से जितनी भी महिला शोषण व सामूहिक बलात्कार की घटनायें हुई हैं उनमें भाजपा नेताओं की संलिप्तता जगजाहिर है तथा इन घटनाओं से भाजपा का महिला विरोधी चेहरा भी उजागर हुआ है। उन्होंने कहा कि चाहे उत्तराखण्ड का चर्चित अंकिता भण्डारी हत्याकांड हो, चाहे बहादराबाद हरिद्वार में चैदह वर्षीय मासूम से सामूहिक दुष्कर्म की घटना इन सबमें भाजपा के नेताओं की संलिप्तता रही है। उन्होंने कहा कि यही नहीं इससे पहले भी भाजपा के केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद स्वामी, कुलदीप सेंगर, प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कुमार, पूर्व विधायक महेश नेगी, सुरेश राठौर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, बृजभूषण शरण सिंह पर भी इसी प्रकार के आरोप लगे हैं तथा भाजपा के पूर्व मंत्री कुलदीप सेंगर महिला उत्पीड़न के मामले मे आज भी जेल की हवा खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारें ऐसे गंभीर आरोप के दोषियों को बचाने का काम करती रही है। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा की सरकारों में महिलायें सबसे अधिक पीड़ित हैं, और आज पूरे देश में भाजपा शासित प्रदेशों में महिलाएं अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं परन्तु मानसिक रूप से विक्षिप्त कंगना रणावत को देश के अन्नदाता किसानों में हत्यारे और दुष्कर्मी दिखाई दे रहे हैं। इस अवसर पर कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर प्रतिमा सिंह ने मांग की है कि भाजपा सांसद कंगना राणावत को जरा सी भी शर्म बाकी है तो उन्हें अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से किसानों से माफी मांगनी चाहिए तथा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को कंगना राणावत के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए तथा अगला संसद सत्र शुरू होने से पूर्व उनका उपचार किसी मानसिक चिकित्सालय में कराना चाहिए।

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