पांवटा साहिब ,
पांवटा साहिब अगस्त 26 (हरबख्श सिंह) पांवटा साहिब एक ऐसी नगरी है जो अपनी गोद में बहुत सारे रहस्य छुपाए हुए हैं और कुछ रहस्यों को उजागर किया गया है और कुछ रहस्यों को गुर संगत उजागर करने में सक्षम नहीं हो सके। परनामस्वरूप कुश पवित्र अस्थान या तो उजागर हो गए और कुछ को उजागर किया जा रहा है। दशमेश पिता साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी दी चरणछोह प्रपात दो स्थान पहला गुरुद्वारा छाऊनी साहिब गांव अकालगढ़ दूसरा अस्थान तप अस्थान कालसी नगरी में पुरातन ठाकर द्वारा नाम का है। गुरु नानक नाम लेवा संगत ने इन पवित्र स्थानों को ढूंढ लिया है और दशमेश पिता साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी दी अपार बखशश से इन स्थान अब चरहदिकला में उजागत किए गए हैं। गुरुद्वारा श्री छाओनी साहिब अकाल गढ़ पांवटा साहिब में मुख सेवादार संत कुलदीप सिंह जी ओर संगत के सहयोग से एक आलीशान किला नुमा गुरुद्वारा साहिब की ईमारत खड़ी कर दी गई है और अभी भी बहुत कुश करना बाकी है। गुरुद्वारा कालपी ऋषि के तप अस्थान को अभी अभी कुछ समय पहले ही उजागर करके उस अस्थान पर अभी केवल निशान साहिब को स्थापत किया गया है।
इन दोनो पवित्र स्थानों में साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी खुद आए थे और अपने चरणों से पवित्र किया। गुरुद्वारा श्री छाओनी साहिब में भंगानी के युद्ध में जाते समय अपनी फौज को इस स्थान इकत्तर किया था और पूरी युद्ध की तैयारी करके भगानी को रवाना हुए और पहाड़ी राजाओं के साथ युद्ध करके उनको धूल चटाई।
गुरु नानक नाम लेवा समूह संगत की निवेदन है कि इन पवित्र स्थानों पर पहुंचें और अपने तन मन धन से सेवा करके गुरु गोबिंद सिंह जी की आशीर्वाद प्राप्त करके जीवन यात्रा सफल बनाएं।