बंगाल से उत्तराखंड का विशेष सांस्कृतिक जुड़ाव, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम : सतपाल महाराज

देहरादून ,

उत्तराखंड के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बंगाल और पूर्वी भारत का उत्तराखंड से विशेष भावनात्मक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। यही कारण है कि राज्य सरकार हर वर्ष कोलकाता में आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (TTF) जैसे मंचों पर उत्तराखंड की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।

शुक्रवार को कोलकाता के बिस्वा बांग्ला मेला प्रांगण में आयोजित भारत के सबसे बड़े ट्रैवल ट्रेड शो नेटवर्क TTF (ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर) में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए सतपाल महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड आज दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य पर्यटन को केवल चारधाम यात्रा तक सीमित न रखकर साहसिक, ग्रामीण, सीमांत, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का व्यापक केंद्र बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। चमोली की नीति घाटी में नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन का सफल आयोजन समुद्र तल से 14,300 फीट से अधिक ऊंचाई पर किया गया, जिसमें देशभर से 1,200 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। वहीं आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन में 26 राज्यों के लगभग 1,000 प्रतिभागियों की भागीदारी रही। ये दोनों आयोजन विश्व की सबसे चुनौतीपूर्ण अल्ट्रा मैराथनों में शामिल हैं।

सतपाल महाराज ने कहा कि TTF कोलकाता उत्तराखंड की नई पर्यटन योजनाओं और विविध पर्यटन उत्पादों को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों तक पहुंचाने का प्रभावी मंच है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश के उन पहले राज्यों में शामिल है, जहां चारधाम यात्रा के लिए आधार आधारित प्रमाणिक पंजीकरण व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनी है।

उन्होंने ट्रैवल एजेंसियों और टूर ऑपरेटर्स से अपील की कि वे उत्तराखंड को केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक समग्र अनुभव के रूप में अपने ग्राहकों तक पहुंचाएं।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने होटल एवं आतिथ्य क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति लागू की है, जिससे होमस्टे संचालकों, होटल व्यवसायियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को सरल पंजीकरण और बेहतर अवसर मिलेंगे। साथ ही राज्य के 100 से अधिक ट्रैकिंग रूटों की जीपीएस मैपिंग का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है, जिससे साहसिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और उत्तराखंड विश्व पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित होगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन पर्यटन उद्योग की सक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ उत्तराखंड में पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करेगा।

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