देहरादून,
गुरमीत सिंह (सेनि) से सोमवार को लोक भवन में विशेष प्रमुख सचिव, खेल एवं युवा कल्याण तथा कुलपति, उत्तराखंड खेल विश्वविद्यालय अमित कुमार सिन्हा ने शिष्टाचार भेंट की। यह भेंट राज्य में खेल एवं युवा विकास से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के दौरान प्रदेश में खेल संरचना को मजबूत करने, युवाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने और खेल विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, इस शिष्टाचार भेंट का मुख्य उद्देश्य राज्य में खेल गतिविधियों को नई दिशा देना और संस्थागत स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करना था। राज्यपाल ने प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उचित प्रशिक्षण, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है।
बैठक के दौरान अमित कुमार सिन्हा ने राज्यपाल को खेल एवं युवा कल्याण विभाग की वर्तमान गतिविधियों, योजनाओं और भविष्य की रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विभाग का फोकस जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करने पर है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड खेल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी प्रगति की जानकारी भी साझा की।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं के समग्र व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने विश्वविद्यालय और विभाग को निर्देशित किया कि खेल को शिक्षा के साथ जोड़ते हुए ऐसा वातावरण बनाया जाए, जिसमें विद्यार्थी शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बन सकें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि प्रतिभाओं की शुरुआती पहचान संभव हो सके।
बैठक में उत्तराखंड खेल विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से अपेक्षा जताई कि वह केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान न रहकर उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षण, खेल विज्ञान अनुसंधान और कोचिंग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय आधुनिक तकनीक, खेल विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाएगा, तो प्रदेश के खिलाड़ियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
अमित कुमार सिन्हा ने राज्यपाल को अवगत कराया कि विश्वविद्यालय में खेल विज्ञान, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट और उच्च स्तरीय कोचिंग कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। साथ ही, प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्ति और विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल पर भी काम चल रहा है।
बैठक में युवाओं को नशे और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखने में खेलों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ। राज्यपाल ने कहा कि यदि युवाओं को खेलों से जोड़ा जाए तो यह सामाजिक रूप से भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
इसके अतिरिक्त, खेल अवसंरचना के विकास पर भी चर्चा हुई। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि जिलों में उपलब्ध खेल मैदानों और स्टेडियमों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो, वहां नई सुविधाएं विकसित की जाएं। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में खिलाड़ियों की पहुंच बढ़ाने के लिए मोबाइल कोचिंग कैंप और क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर बल दिया।
अमित कुमार सिन्हा ने आश्वस्त किया कि विभाग राज्यपाल के सुझावों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि विभाग विभिन्न खेल संघों और संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाकर राज्य में खेल गतिविधियों को और अधिक गति देने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खिलाड़ियों का डाटा बैंक तैयार करने की पहल भी की जा रही है, जिससे प्रतिभाओं की निगरानी और मार्गदर्शन आसान होगा।
बैठक के अंत में राज्यपाल ने विभाग और विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तो उत्तराखंड खेलों के क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि आने वाले वर्षों में प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
इस शिष्टाचार भेंट को राज्य में खेल और युवा नीति को आगे बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यपाल के सुझावों के अनुरूप योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो उत्तराखंड में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिल सकती है और युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुल सकते हैं।