देहरादून ,
अपने कड़क फैसलों और जनसेवा से जुड़े प्रभावी कार्यों के चलते देहरादून में एक सख्त और परिणामोन्मुखी प्रशासक की छवि बना चुके जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्णयों पर अब भारत सरकार ने भी मुहर लगा दी है। केंद्र सरकार ने डीएम को गैर-जिम्मेदार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की अनुमति दे दी है।
डीएम सविन बंसल इससे पहले भी राजकीय कार्यों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को चेतावनी देते रहे हैं, लेकिन सरकारी बैठकों और निर्देशों की अनदेखी करने वाले अफसरों पर उन्होंने बिना भेदभाव कार्रवाई भी की है। ताजा मामला जनगणना 2026 से जुड़ा है, जिसमें अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ गई।
जनगणना बैठक से गैरहाजिरी, गृह मंत्रालय ने जताया कड़ा रोष
भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना प्रक्रिया के अग्रिम चरण में प्रवेश के लिए जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित किया गया है। इसके तहत जनगणना चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति, नियमित बैठकें, क्षेत्र निर्धारण और अंतरविभागीय समन्वय समयबद्ध रूप से पूरा किया जाना अनिवार्य है।
इसी क्रम में 28 जनवरी 2026 को निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय) और जिला प्रशासन देहरादून की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की लिखित सूचना और फोन कॉल के बावजूद
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कैन्ट बोर्ड गढ़ी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी
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छावनी परिषद क्लेमनटाउन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी
बैठक में शामिल नहीं हुए। इस पर निदेशक जनगणना ने कड़ा रोष व्यक्त किया।
ADM के व्यक्तिगत फोन के बाद भी नहीं सुधरे अफसर
इसके बाद 31 जनवरी 2026 को पुनः बैठक बुलाई गई, जिसकी सूचना पहले ही भेज दी गई थी। साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. के. मिश्रा ने दोनों अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से फोन पर संपर्क कर बैठक के महत्व को समझाया, इसके बावजूद दोनों अधिकारी फिर अनुपस्थित रहे।
लापरवाही से जनगणना प्रक्रिया प्रभावित
अधिकारियों की गैरहाजिरी के चलते संबंधित छावनी क्षेत्रों का क्षेत्र निर्धारण नहीं हो सका, जिससे जनगणना की प्रारंभिक कार्यवाही भी शुरू नहीं हो पाई। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय) ने Census Act, 1948 के तहत कार्रवाई की संस्तुति की।
Census Act के तहत कार्रवाई, कारावास का भी प्रावधान
जिला प्रशासन देहरादून और निदेशक जनगणना द्वारा संयुक्त रूप से Census Act, 1948 की धारा 6, 7 और 11 के अंतर्गत अग्रिम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है, जिसमें एक माह तक के कारावास का प्रावधान भी है।