प्रोटोकॉल से परे संवेदना: आईएएस बंशीधर तिवारी ने अनाथ बालिकाओं संग सादगी से मनाया जन्मदिन

देहरादून ,
जब प्रशासनिक पद, प्रोटोकॉल और औपचारिकताओं की दीवारें टूटती हैं, तब शासन का मानवीय चेहरा सामने आता है। ऐसा ही दृश्य देहरादून के बनियावाला क्षेत्र में देखने को मिला, जहां अपर सचिव मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) एवं महानिदेशक सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग, आईएएस बंशीधर तिवारी ने अपना जन्मदिन अनाथ और वंचित बालिकाओं के साथ सादगी व संवेदना के साथ मनाया।

यह आयोजन किसी भव्य समारोह का हिस्सा नहीं था, बल्कि वर्षों से चली आ रही उनकी एक परंपरा का हिस्सा है, जिसे वे हर साल बिना किसी प्रचार-प्रसार के निभाते आ रहे हैं। सहसपुर विधानसभा के विकासखंड बनियावाला क्षेत्र स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में उन्होंने अपने परिजनों के साथ समय बिताया।

छात्रावास की बालिकाओं ने अतिथियों के स्वागत में गीत प्रस्तुत किए, जिनमें जीवन, संघर्ष और उम्मीद की सजीव झलक दिखाई दी। तालियों और मुस्कानों से भरा यह माहौल किसी सरकारी कार्यक्रम की बजाय एक पारिवारिक उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था। यह छात्रावास उन बालिकाओं का आश्रय है, जिन्होंने जीवन की शुरुआत कठिन परिस्थितियों में की—कोई अनाथ है, कोई एकल अभिभावक के सहारे है, तो कोई भीख मांगने या कूड़ा बीनने जैसे हालातों से निकलकर यहां तक पहुंची है।

आईएएस बंशीधर तिवारी ने न कोई औपचारिक भाषण दिया और न ही पद की दूरी बनाए रखी। वे बच्चियों के साथ जमीन पर बैठे, उनके साथ केक काटा, उपहार वितरित किए और आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बालिकाओं से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में बातचीत की, जो औपचारिक नहीं बल्कि अपनत्व से भरी हुई थी।

इस अवसर पर परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। इसे केवल पर्यावरणीय गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा गया। उन्होंने कहा कि जैसे एक पौधा समय के साथ बड़ा होकर छाया और फल देता है, वैसे ही यदि इन बालिकाओं को सही शिक्षा, मार्गदर्शन और स्नेह मिले, तो वे समाज को सशक्त दिशा देने वाली बन सकती हैं।

मौजूद लोगों ने कहा कि आज के दौर में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा हर वर्ष अपना जन्मदिन अनाथ बच्चों के साथ मनाना समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश है, जो प्रशासन के मानवीय पक्ष को उजागर करता है।

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