हरिद्वार,
आध्यात्मिक संस्था शांतिकुंज अपने शताब्दी वर्ष का समारोह वर्ष 2026 में वृहद स्तर पर मनाने जा रही है। आगामी कार्यक्रम की तैयारियों के अंतर्गत आज बैरागी कैंप स्थित शांतिकुंज शताब्दी नगर में भूमि पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने विशेष रूप से शिरकत की।
भूमि पूजन कार्यक्रम में शांतिकुंज प्रमुखों, देशभर के संत-महात्माओं तथा शांतिकुंज के हजारों साधकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान पवित्रता और आध्यात्मिक उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। आगामी चार दिवसीय शताब्दी समारोह जनवरी 2026 में आयोजित होगा, जिसमें देश-विदेश से हजारों साधकों के पहुंचने की संभावना है।
गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि चिन्मय पण्ड्या ने 51 तीर्थों से लाए गए पवित्र रज-जल का पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। यह शताब्दी समारोह तीन महत्वपूर्ण अवसरों को समर्पित है—
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परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के 100 वर्ष
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अखंड दीप प्रज्वलन के 100 वर्ष
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पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की तप साधना के 100 वर्ष
इस दौरान उपस्थित सभी अतिथियों ने विश्व मैत्री, पर्यावरण शुद्धि और सांस्कृतिक एकता का संकल्प लिया।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शांतिकुंज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था मानव कल्याण, सांस्कृतिक उत्थान और आध्यात्मिक जागरण के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार और देव संस्कृति विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक केंद्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक गुरुकुल हैं, जहाँ शिक्षा को साधना और जीवनोपयोगी मूल्यों का आधार माना जाता है।
उन्होंने हरिद्वार की तपोभूमि को ऊर्जा, प्रेरणा और लोक कल्याण का केंद्र बताते हुए कहा कि शांतिकुंज के नेतृत्व में चिन्मय पण्ड्या आधुनिकता और अध्यात्म के समन्वय से समाज को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि अखंड ज्योति केवल एक दीप नहीं, बल्कि अखंड भारत की भावना, धर्म-जागरण और भारतीय आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जिसकी ज्योति सत्य, नैतिकता और एकता का संदेश देती है।

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