पिता की मौत के बाद संकट में थीं दो बहनें, देहरादून DM सविन बंसल बने सहारा — पढ़ाई, आवास और ऋण समस्या का तुरंत समाधान

देहरादून ,

पिता की मृत्यु के बाद जीवन संघर्षों से घिरीं चित्रा और हेतल की आँखों में उम्मीद तब जगी जब वे अपनी समस्याएँ लेकर देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल के पास पहुँचीं। मीडिया और लोगों से सुनी संवेदनशील डीएम की कहानियाँ उनके दिल में भरोसा जगाती थीं, और वही भरोसा उन्हें इस उम्मीद के दरवाज़े तक ले आया।

दोनों बहनों ने जिलाधिकारी के सामने अपनी व्यथा रखी — पिता के निधन के बाद चित्रा की B.Com (Hons.) की पढ़ाई रुक गई थी, फीस जमा करने की क्षमता नहीं थी, और बैंक पिता द्वारा लिए गए ऋण के कारण घर कुर्क करने की चेतावनी दे रहा था। उनकी बात सुनकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने तुरंत संवेदनशील निर्णय लिए।

चित्रा का प्रतिष्ठित संस्थान में B.Com (Hons.) में त्वरित प्रवेश

DM बंसल ने तत्काल निर्णय लेते हुए चित्रा को जिला प्रशासन के सारथी वाहन से कॉलेज भेजा और प्रतिष्ठित निजी संस्थान में उसका तुरंत दाखिला सुनिश्चित कराया।

इसके साथ ही तय हुआ कि —

  • चित्रा की पूरी पढ़ाई,

  • किताबें,

  • आवाजाही,

का पूरा खर्च जिला प्रशासन और संस्थान संयुक्त रूप से वहन करेंगे। इस खबर से चित्रा और हेतल की आँखों में खुशी और राहत साफ दिखी।

पिता के बैंक ऋण से राहत की पहल भी शुरू

दोनों बहनों ने बताया कि उनके पिता ने बैंक से ऋण लिया था, बीमारी के कारण वे इसे चुकाने में असमर्थ रहे और 23 अक्टूबर 2025 को उनका निधन हो गया। अब बैंक घर खाली कराने का दबाव बना रहा था।

जिलाधिकारी ने तुरंत उप जिलाधिकारी न्याय एवं LDM को ऋण से जुड़े बीमा प्रावधानों की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि बहनों को राहत मिल सके।

DM सविन बंसल की त्वरित कार्यशैली बनी लोगों की उम्मीद

पिछले एक वर्ष में देहरादून जिला प्रशासन की कार्यशैली में आई सकारात्मक परिवर्तन को लोग महसूस कर रहे हैं। समस्याओं का तेजी से समाधान, मॉनिटरिंग की मजबूत व्यवस्था और जनता से सीधा संवाद—इन सबने DM कार्यालय को लोगों की उम्मीद का केंद्र बना दिया है।

DM स्वयं

  • गंभीर प्रकरणों की निगरानी,

  • एलएमएस पोर्टल के माध्यम से समीक्षा,

  • और समयबद्ध निस्तारण

सुनिश्चित कर रहे हैं, जो प्रदेश में प्रशासनिक सेवा की एक मिसाल मानी जा रही है।

चित्रा और हेतल जैसे कई परिवार आज प्रशासन के इस मानवीय चेहरे से लाभान्वित हो रहे हैं। DM बंसल का यह संवेदनशील निर्णय फिर साबित करता है कि शासन का उद्देश्य केवल व्यवस्था चलाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों का सहारा बनना भी है

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