देहरादून ,
भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अब उत्तराखंड में भी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू होने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी. वी. पुरुषोत्तम ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया को गंभीरता से लें। उन्होंने बताया कि राज्य के 11,733 पोलिंग बूथों पर प्रत्येक बूथ के लिए एक प्रतिनिधि (बीएलओ) नियुक्त करने की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक सिर्फ 2,744 बीएलओ के नाम ही प्राप्त हुए हैं।
इस प्रक्रिया के तहत—
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मतदाताओं को स्वयं अपना नाम मतदाता सूची में चेक करना होगा।
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अगर नाम सूची में नहीं है तो आवश्यक दस्तावेज देकर दर्ज कराना होगा।
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यदि किसी मतदाता का नाम देश के किसी अन्य क्षेत्र में भी दर्ज है, तो उसे हटवाना अनिवार्य होगा।
उत्तराखंड में यह SIR 2003 की मतदाता सूची के आधार पर लागू किया जा रहा है। अनुच्छेद 324 और 1950 की धारा 21 के तहत निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण करा सके।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया के चलते देशभर में लगभग 10 करोड़ फर्जी/डुप्लीकेट नाम हटने की संभावना है। इससे आगामी चुनावों में मत प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में कई मतदाताओं के दो या अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने की शिकायतें आई थीं। हाल ही में कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आए थे। आयोग का लक्ष्य है कि देशभर में हर मतदाता का नाम केवल एक ही बूथ की मतदाता सूची में दर्ज हो।