देहरादून,
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को गरिमा, संरक्षण और न्याय देने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसी दिशा में जिलाधिकारियों को जिला स्तरीय अपीलीय अधिकरणों के पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त करते हुए, वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
🛡 कानूनी सुरक्षा: MWPSC Act 2007
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (MWPSC Act)’ को राज्य में प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
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यह अधिनियम वरिष्ठ नागरिकों को पुत्र, पौत्र, या संपत्ति के उत्तराधिकारियों से वैधानिक रूप से भरण-पोषण का अधिकार देता है।
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राज्य में 13 जिला स्तरीय अपीलीय अधिकरण और 69 से अधिक उपमंडलीय भरण-पोषण अधिकरण कार्यरत हैं।
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अधिकतम ₹10,000 प्रतिमाह की भरण-पोषण राशि निर्धारित की जा सकती है।
🏛 प्रशासनिक जिम्मेदारियां
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जिला मजिस्ट्रेट: अपीलीय अधिकरण के पीठासीन अधिकारी
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उप जिलाधिकारी (SDM): तहसील स्तर के अधिकरणों के प्रभारी
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जिला समाज कल्याण अधिकारी (DSWO): पदेन भरण-पोषण अधिकारी
🏠 संपत्ति हस्तांतरण सुरक्षा प्रावधान
यदि कोई वरिष्ठ नागरिक देखभाल की शर्त पर संपत्ति स्थानांतरित करता है और शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो अधिकरण उस हस्तांतरण को रद्द कर संपत्ति वापस कर सकता है।
🏡 सेवाएं और कल्याण परिषद गठन
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बागेश्वर, चमोली, उत्तरकाशी में निशुल्क वृद्ध एवं निशक्तजन आवास गृह संचालित।
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वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद का गठन:
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अध्यक्ष: श्री रामचंद्र गौड़
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उपाध्यक्ष: श्रीमती शांति मेहरा, श्री नवीन वर्मा, श्री हरक सिंह नेगी
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📣 सीएम धामी की अपील
“यदि कोई वरिष्ठ नागरिक उपेक्षित महसूस करता है तो वह तुरंत अपने नजदीकी भरण-पोषण अधिकरण या जिला समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क करे। राज्य सरकार हर हाल में उनके अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है।”
