देहरादून,
उत्तराखंड सहकारिता विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला “सहकार मंथन-2025” के समापन सत्र में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ऐलान किया कि प्रदेश में सहकारी क्षेत्र को भविष्य उन्मुख और पारदर्शी बनाने के लिए सहकारी अधिनियमों और नियमों में बदलाव किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सहकारिता अब महज बैंकिंग नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक आंदोलन बन रही है। इसके लिए पारदर्शिता, तकनीकी समावेशन और स्थानीय सहभागिता आवश्यक है।
🔹 महत्वपूर्ण घोषणाएं और निर्देश:
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2025-26 के अंत तक 1 लाख नए सदस्य और बैंक खाते बनाए जाएंगे।
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सहकारी बैंकों में ट्रांसफर अब प्रदर्शन आधारित होंगे।
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निष्क्रिय 1500 समितियों का पुनर्गठन/विलयन किया जाएगा।
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24 जुलाई से हरिद्वार में निरीक्षण अभियान की शुरुआत।
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350 प्रोफेशनल सचिवों की ऐतिहासिक भर्ती लिखित परीक्षा से होगी।
🧩 पांच नवाचारपरक सहकारी मॉडल होंगे लागू:
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मेडिकल कोऑपरेटिव:
ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं (अस्पताल, फार्मेसी, बीमा आदि)। -
युवा सहकार:
युवाओं को स्टार्टअप, एग्रीटेक, ई-कॉमर्स, डेयरी व आईटी सेक्टर में सहकारिता से जोड़ना। -
वन सहकारिता:
आदिवासी व वनवासी समुदायों को लघु वनोपज से जोड़कर आय सृजन और पर्यावरण संरक्षण। -
टूरिज्म कोऑपरेटिव:
ग्रामीण पर्यटन, होम-स्टे, लोककला व गाइड सेवाओं के माध्यम से स्थानीय रोजगार। -
मल्टीनेशनल फिशरीज कोऑपरेटिव:
मत्स्य पालन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी सहकारी मॉडल की स्थापना।
🧭 नीति निर्माण हेतु 6 विषयों पर विशेषज्ञ मंथन:
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में 6 विषयों पर गहन चर्चा की गई:
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Digital Transformation
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Green Development
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State Cooperative Enhancement
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Consumer-Centric Banking
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Training & Education
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Rural Innovation
📣 डॉ. धन सिंह रावत ने कहा:
“सहकारिता में संभावनाएं अपार हैं, जरूरत है इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन की। हमें आधे भरे गिलास को अवसर की तरह देखना होगा।”
👥 कार्यशाला में प्रमुख अधिकारी एवं सहभागी:
सुभाष रमोला (पूर्व अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक), निबंधक मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक ईरा उप्रेती, आनंद शुक्ल, नीरज बेलवाल, मंगला त्रिपाठी, रमिंद्री मंदरवाल, राजेश चौहान सहित विभिन्न जनपदों से आए अधिकारी और सहकार बंधु उपस्थित रहे।
📌 सितंबर से राज्य में सहकारिता मेले आयोजित होंगे, तैयारियों के निर्देश जारी।
📍 प्रदेश की कुल 670 पैक्स समितियों व 30 लाख से अधिक लोग सहकारी ढांचे से जुड़े हुए हैं।
